
सुशांत की मौत के करीब दो महीने बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई है. अब सीबीआई जो भी सच सामने लाएगी वो उन्हीं सबूतों, तस्वीरों, वीडियो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होंगी जो मुंबई पुलिस के पास है. अलबत्ता केस से जुड़े गवाहों के बयान सीबीआई नए सिरे से जरूर दर्ज करेगी. पर इन सारी चीजों में सीबीआई के लिए सबसे अहम पोस्टमार्टम रिपोर्ट है.
सुशांत के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट, सुशांत के घर में मौजूद चश्मदीदों के बयान और सुशांत के कमरे की तस्वीरें-वीडियो. बस यही वो तीन चीज़ें हैं, जिनमें सुशांत की मौत का सच छुपा है. यही तीन चीज़ें इस बात का खुलासा करेंगी कि सुशांत की मौत खुदकुशी है या कत्ल? और यही वो तीन चीज़ें हैं जहां से सीबीआई अपनी जांच की शुरुआत करने जा रही है.
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सीबीआई को इस मामले की जांच पूरे दो महीने बाद मिली है. ऐसे में सीबीआई की मजबूरी है कि वो सीन ऑफ क्राइम यानी जिस कमरे में सुशांत की लाश मिली, वहां की उस वक्त की तस्वीरें और वीडियो को ही अपनी जांच का केंद्र बनाए. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इन तस्वीरों और वीडियो से भी सुशांत की मौत के सच को सामने लाया जा सकता है. इन तस्वीरों और वीडियो को सामने रख कर ही सीबीआई की टीम उसी कमरे में पूरे सीन को रिक्रिएट कर सकती है.
हालांकि इसमें एक दिक्कत ये है कि सुशांत की पंखे से झूलती लाश की कोई तस्वीर या वीडियो नहीं है. क्योंकि घर के स्टाफ ने पुलिस और फॉरेंसिक टीम के आने से पहले ही लाश फंदे से नीचे उतार ली थी. ऐसे में अब सीबीआई को उन चश्मदीदों के बयान पर निर्भर करना होगा, जिन्होंने अपनी आंखों से फंदे से लाश झूलती देखी थी और फिर उसे नीचे उतारा था.
चश्मदीदों के बयान के आधार पर ही पुलिस पूरे मामले को रिक्रिएट कर ये देखेगी कि क्या बिना किसी स्टूल या दूसरे सहारे के बेड पर खड़े होकर पहले पंखे और फिर गले में फंदा कसा जा सकता है? क्या किसी कुर्ते से फांसी लगाई जा सकती है? मुंबई पुलिस के मुताबिक सुशांत ने फैब इंडिया के कुर्ते से फांसी लगाई थी. हरे रंग का ये कुर्ता फिलहाल मुंबई पुलिस के कब्जे में है, जो जाहिर है अब सीबीआई को सौंप दिया जाएगा.
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सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच के लिए बाकायदा बोर्ड ऑफ फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स गठित किया जाएगा. अमूमन सीबीआई फॉरेंसिक टीम के लिए दिल्ली के एम्स के डॉक्टरों की मदद लेती है. यानी फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम में एम्स के डॉक्टर शामिल होंगे. इस पूरे मामले में सीबीआई के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम है. क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच के बाद ही ये तय हो जाएगा कि मामला खुदकुशी का है या क़त्ल का? आगे का केस फिर उसी हिसाब से बढ़ेगा. यानी सीबीआई को सबसे पहले यही पता लगाना है कि सुशांत की मौत खुदकुशी है या फिर क़त्ल?
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के ज़रिए आखिरी नतीजे तक पहुंचने में चश्मदीदों के बयान सबसे अहम होंगे. खास कर उन चार चश्मदीदों के, जो सुशांत की मौत के वक्त सुशांत के घर में मौजूद थे. इनमें सुशांत के दो रसोइये, एक हाउसकीपर और दोस्त सिद्धार्थ पिठानी शामिल हैं. यही वो चार चश्मदीद हैं, जिन्होंने सुशांत को आखिरी बार ज़िंदा देखा और सबसे पहले मुर्दा देखा भी.
14 जून की सुबह से लेकर दोपहर तक के हर राज़ इन्हीं चारों के बयान से फाश होंगे. मुंबई पुलिस ने भी सबसे पहले इन्हीं चारों के बयान लिए थे. अब एक बार फिर ये चारों सीबीआई के सामने होंगे. इन तीन अहम कड़ियों के अलावा सच सामने लाने में उन डॉक्टरों के बयान भी काफी अहम होंगे, जो सुशांत का इलाज कर रहे थे. सुशांत की बीमारी को लेकर परिवार ने जो भी इल्ज़ाम लगाए हैं, वो इन डॉक्टरों से पूछताछ में साफ हो जाएगा.