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डिफेंस न्यूज

भारतीय सेना को जल्द मिल सकता है कंधे पर रखकर दागने वाला नया रॉकेट लॉन्चर, जानिए इसकी ताकत

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 7:22 PM IST
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स्वीडिश हथियार कंपनी SAAB ने ट्वीट करके कहा है कि बहुत जल्द उनका AT4 वेपन सिस्टम भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पास होगा. इस हथियार का इस्तेमाल भारतीय सेना भी करेगी. उन्होंने भी इस 84 mm रिकॉयललेस रॉकेट लॉन्चर का ऑर्डर दिया है. यह टैंकों, बंकरों, हेलिकॉप्टरों को उड़ाने वाला रॉकेट लॉन्चर है. (फोटोः गेटी)

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AT4 दुनियाभर के कई देशों में 1987 से इस्तेमाल किया जा रहा है. अब तक 6 लाख से ज्यादा एटी4 रॉकेट लॉन्चर बनाए जा चुके हैं. इस रॉकेट लॉन्चर के अलग-अलग वैरिएंट्स 6.7 से 8 किलोग्राम वजनी होते हैं. (फोटोः एएफपी)

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हर रॉकेट लॉन्चर की लंबाई 40 इंच होती है. इसमें 84 मिलिमीटर कैलिबर को गोले लगते हैं. इससे निकलने वाले रॉकेट की स्पीड 1000 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है. इस लॉन्चर की कॉम्बैट रेंज 300 मीटर है. (फोटोः एएफपी)

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अधिकतम यह 2100 मीटर तक मार सकता है. इस लॉन्चर में ऊपर की तरफ आयरन साइट, नाइट विजन यूनिट या अन्य जरूरी माउंट लगा सकते हैं. इसमें 440 ग्राम वजनी हाई-एक्स्प्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) रॉकेट्स या गोले लगाए जाते हैं. (फोटोः एएफपी)

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असल में यह एंटी-टैंक हथियार ही है. लेकिन इससे अन्य टारगेट्स को भी मार गिरा सकते हैं. यह हथियार माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक काम कर सकता है. इसमें पांच तरह के हथियार लगाकर दाग सकते हैं. (फोटोः गेटी)

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जैसे- हीट, दूसरा है बंकर, बिल्डिंग, हल्के बख्तरबंद वाहन के लिए हाई-एक्सप्लोसिव ड्युल परपज (HEDP). तीसरा है हाई पेनेट्रेशन गोले. जो 24 इंच तक के फौलाद को छेद सकते हैं. चौथा है एंटी-स्ट्रक्चर टैंडेम वॉरहेड यानी भयानक विस्फोट करने वाले गोले. पांचवा है एक्सटेंडेड रेंज. यानी लंबी दूरी तक मार करने वाले गोले. (फोटोः एएफपी)

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इस हथियार का इस्तेमाल पनामा युद्ध, सोवियत-अफगान युद्ध, कुर्द-तुर्की की जंग, खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान युद्ध, इराक वॉर, सीरिया युद्ध में इस्तेमाल हो चुका है. यहां तक कि यूक्रेन पर हुए रूसी हमले में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. (फोटोः एएफपी)

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