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डिफेंस न्यूज

चार मंजिल ऊंची, 7 टन के गोले, 47 km की मारक रेंज... हिटलर ने बनवाई थी दुनिया की सबसे बड़ी तोप

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST
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द्वितीय विश्व युद्ध का समय था. फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ भयानक किलेबंदी कर रखी थी. नाज़ी सेना हमला नहीं कर पा रही थी. तब हिटलर ने ऐसी तोप बनवाई, जो विशालकाय थी. इस तोप का नाम रखा गया था श्वेरर गुस्ताव. यह 80 सेंटीमीटर कैलिबर की रेलवे गन थी. (फोटोः विकिपीडिया)

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इस तोप का इस्तेमाल जर्मनी ने 1941 से 1945 तक किया. इसे बनाया था क्रप (Krupp) कंपनी ने. डिजाइनिंग 1937 में हुई थी. जर्मनी ने ऐसी सिर्फ दो ही तोपें बनाई थीं. यह तोप किसी युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सबसे ज्यादा कैलिबर का हथियार थी. यह दुनिया की सबसे भारी आर्टिलरी थी. (फोटोः विकिपीडिया)

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सेवास्तोपोल के युद्ध के समय इसका इस्तेमाल किया गया. 4000 लोगों ने मिलकर पांच हफ्ते में इस तोप को फायरिंग पोजिशन पर तैनात किया. इसका एक गोला दागने के लिए 500 लोग लगते थे. मई के शुरुआत में इसे तैनात करना शुरू किया गया. 5 जून तक यह फायरिंग पोजिशन पर आ गई.  (फोटोः विकिपीडिया)

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5 जून को 25 किलोमीटर दूर कोस्टल गन पर इस तोप के जरिए आठ गोले दागे गए. इसके फोर्ट स्टालिन पर छह गोले दागे गए. 6 जून को फोर्ट मोलोतोव पर सात गोले दागे गए. सेवर्नाया की खाड़ी में मौजूद व्हाइट क्लिफ नाम के आयुध डिपो पर इस तोप ने नौ गोले दाग कर उसे बर्बाद कर दिया था. (फोटोः विकिपीडिया)

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व्हाइट क्लिफ नाम समंदर के अंदर 30 मीटर की गहराई में था. इसकी दीवार 10 मीटर कॉन्क्रीट से बनी थी. इसके बाद भी हिटलर की तोप ने उसकी धज्जियां उड़ा दीं. 7 जून को सैनिकों के सपोर्ट में सात गोले दागे गए. 11 जून को फोर्ट साइबेरिया में पांच गोले और 17 जून को मैक्सिम गोर्की फोर्ट्रेस में पांच गोले दागे गए. (फोटोः विकिपीडिया)

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श्वेरर गुस्ताव तोप 1350 टन वजनी थी. इसकी ऊंचाई 38.1 फीट थी. लंबाई 155.2 फीट और चौड़ाई 23.4 फीट थी. इसकी नली खुद 106.8 फीट लंबी थी. इसे चलाने के लिए तैयार करने में 50 लोग लगते थे. ट्रैक बिछाने और तोप को सही पोजिशन पर लाने के लिए 250. इसकी सुरक्षा के लिए 250 नाज़ी सैनिकों की बटालियन तैनात रहती थीं. (फोटोः विकिपीडिया)

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इसमें से दो तरह के गोले दागे जाते थे. पहला आर्मर्ड पीयर्सिंग शेल यानी बख्तरबंद, टैंक, तोप, जहाज आदि को उड़ाने के लिए. दूसरा हाई-एक्सप्लोसिव शेल यानी तेज धमाके वाला गोला. इसमें लगने वाले गोले का वजन 7 टन होता था. यह तोप 30 से 45 मिनट में एक गोला दागती थी. यानी दिन भर में 14 गोले दाग सकती थी. (फोटोः विकिपीडिया)

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इसके गोले 2400 से 2700 फीट प्रति सेकेंड की स्पीड में टारगेट की तरफ बढ़ते थे. आमतौर पर इसकी रेंज 39 किलोमीटर थी. लेकिन यह अधिकतम 47 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती थी. इसके गोले ही 11.10 फीट लंबे होते थे. एक गोला गिरता था तो 23 से 30 फीट चौड़ा गड्ढा हो जाता था. (फोटोः विकिपीडिया)

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बाद में इस तरह के तोप की नकल कई देशों ने की. फ्रांस, अमेरिका सबने जर्मनी के इस ऐतिहासिक तोप की नकल करते हुए कम कैलिबर की गन बनाईं. लेकिन इस तोप ने जो इतिहास लिखा वो आजतक कोई तोप नहीं कर पाया. इसके दो छोटे वर्जन बनाए गए थे. पहला डोरा और दूसरा लैंगर गुस्ताव. (फोटोः विकिपीडिया) 

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