
रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquistion Council - DAC) ने विभिन्न रक्षा प्रस्तावों के लिए 84,560 करोड़ रुपए को आवश्यकता हेतु स्वीकृति (AoN) दी है. इस काउंसिल की अध्यक्षता रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की. अब आपको बताते हैं कि इस स्वीकृति से हमारी सेनाओं के लिए क्या-क्या चीजें खरीदी जाएंगी.
15 ट्विन टर्बोप्रॉप C-295 एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे. इसमें से 9 नौसेना और 6 कोस्टगार्ड के लिए होंगे. इस विमान को टाटा और एयरबस मिलकर बना रहे हैं. इसके अलावा वायुसेना के लिए 56 विमान बन रहे हैं.
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वायुसेना और डीआरडीओ ने मिलकर चीन और पाकिस्तान की सीमा पर नजर रखने के लिए छह नेत्र मार्क-1ए एयरबॉर्न अर्ली-वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट खरीदने का प्लान बनाया है. ये आसमान में हमारी निगाहें हैं. नेत्र एक खास तरह का यंत्र है, जो एंबरेयर विमान के ऊपर लगाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य जासूसी और निगरानी है.
तीन सिग्नल इंटेलिजेंस एंड कम्यूनिकेशन जैमिंग एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे. ये एयरबस-319 विमान के ऊपर लगाए जाने वाले हैवी-ड्यूटी सेंसर होते हैं. इसके अलावा वायुसेना के लिए छह हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर विमान खरीदे जाएंगे.
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भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी डील है लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) की. इन्हें भी डीआरडीओ बना रहा है. इन्हें भी खरीदा जाएगा. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर है. इसके अलावा 45 हजार नई जेनरेशन के प्रचंड एंटी-टैंक बारूदी सुरंग जिसमें भूकंपीय सेंसर लगे हो, ये भी खरीदे जाएंगे. इन्हें रिमोट से फोड़ा जा सकेगा.
नौसेना को 48 भारी वजन वाले टॉरपीडो की अनुमति मिल गई हैं. ये टॉरपीडो छह कलवारी यानी स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों में लगाए जाएंगे. इसके अलावा 24 एंटी-सबमरीन MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर, हेलफायर मिसाइल, एमके-54 टॉरपीडो और प्रेसिशिन किल रॉकेट्स खरीदे जाएंगे.
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भारतीय तटरक्षक की जरूरत के अनुसार सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो की खरीद के लिए खरीददारी की मंजूरी दी गई है. यह भारतीय तटरक्षक और भारतीय नौसेना इकाइयों के बीच निर्बाध सूचना आदान-प्रदान के लिए सुरक्षित नेटवर्किंग क्षमता के साथ उच्च गति संचार की भारतीय तटरक्षक की आवश्यकता को पूरा करेगा.