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भारतीय नौसेना चाहती है कि वह कलवारी क्लास की सभी पनडुब्बियों में लंबी दूरी के स्वदेशी टॉरपीडो लगाए. दूसरी प्राथमिकता विदेशी टॉरपीडो खरीदने की भी है. लेकिन पहले स्वदेशी टॉरपीडो को चुना जाएगा. संभावना है कि वरुणास्त्र (Varunastra) को इन पनडुब्बियों में लगाया जाए. यह प्रस्ताव अगले हफ्ते रक्षा मंत्रालय के उच्च-स्तरीय मीटिंग में पेश किया जाना है.
नौसेना का प्रस्ताव है कि दुनिया भर से प्रसिद्ध 48 हैवी वेट टॉरपीडो में से किसी को चुना जाए. साथ ही देश में बने इंडिया इलेक्ट्रिकल हैवीवेट टॉरपीडो का चयन किया जाए. इसे DRDO ने बनाया है. इससे पहले टॉरपीडो खरीदने के दो ग्लोबल प्रयास विफल हो चुके हैं.
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पहला प्रयास इटैलियन टॉरपीडो को साथ जा रहा था लेकिन वह वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद मामले से संबंधित घोटाले में था. इसलिए इटैलियन कंपनी से डील खत्म हो गई. भारतीय नौसेना इसके बाद 98 स्वदेशी टॉरपीडो का इस्तेमाल करेगा. इससे विदेशी खरीद में 50 फीसदी की कमी आएगी.
फिलहाल भारत के पास छह कलवारी क्लास पनडुब्बियां हैं. आईएनस कलवारी (INS Kalvari), आईएनएस खंडेरी (INS Khanderi), आईएनएस करंज (INS Karanj), आईएनएस वेला (INS Vela), आईएनएस वागीर (INS Vagir) और आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer).
कलवारी क्लास पनडुब्बियों की ताकत समझिए
वागशीर के समुद्री ट्रायल चल रहे हैं. इस क्लास की 9 पनडुब्बियां प्लान में हैं. पांच तैनात हैं. एक का ट्रायल चल रहा है. तीन और बनाई जाएंगी. ये सारी पनडुब्बियां हमलावर सबमरीन की कैटेगरी में आती हैं. पानी के अंदर इनका डिस्प्लेसमेंट 1775 टन होता है. 221.5 फीट लंबी पनडुब्बी की ऊंचाई 40.4 फीट है. पानी के ऊपर 20 और अंदर 37 km/hr की गति से चल सकती है. इसमें आठ अधिकारी और 35 नौसैनिक तैनात होते हैं.
इन पनडुब्बियां में 21 इंच के 6 टॉरपीडो ट्यूब्स होते हैं, जिनसे 18 टॉरपीडो दागी जा सकती हैं. इसके अलावा इन पनडुब्बियों में SM.39 Exocet एंटी-शिप मिसाइल, माइका एंटी-एयर मिसाइल लगी होती है. टॉरपीडो हटा दें तो इस क्लास की पनडुब्बियां समंदर में 30 बारूदी सुरंग भी बिछा सकती हैं.
अब जानिए वरुणास्त्र टॉरपीडो की रेंज, स्पीड और दम
DRDO द्वारा बनाई गई वरुणास्त्र (Varunastra) एडवांस्ड ऑटोनॉमस हैवीवेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो है. 25.5 फीट लंबे इस टॉरपीडो का वजन 1500 किलोग्राम है. व्यास 21 इंच है. इसमें 250 किलोग्राम का हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड लगाया जाता है. यह टॉरपीडो इलेक्ट्रिक इंजन से चलता है. फिलहाल इसकी रेंज 40 से 50 किलोमीटर है.
यह टॉरपीडो अदिकतम 2000 फीट की गहराई तक जा सकती है. यह दुश्मन टारगेट की तरफ अधिकतम 74 से 93 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से जाती है. इसे सिर्फ पनडुब्बी से ही नहीं बल्कि युद्धपोत से भी दागा जा सकता है. इस टॉरपीडो को विशाखापट्ट्नम क्लास डेस्ट्रॉयर, दिल्ली क्लास डेस्ट्रॉयर, कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर, राजपूत क्लास डेस्ट्रॉयर, कमोर्ता क्लास कॉर्वेट, नीलगिरी क्लास फ्रिगेट, तलवार क्लास फ्रिगेट और सिंधुघोष क्लास पनडुब्बियों में लगाने की बात कही जाती रही है.