
आज से अगले तीन दिनों तक नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन का पहला संस्करण शुरू हो रहा है. इस बार यह सम्मेलन हाइब्रिड हो रहा है. पहला चरण समुद्र में होगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बार देश के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर यानी आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य की क्षमता देखने के लिए समंदर में उतरेंगे. नौसेना ने इसके लिए एक वीडियो भी जारी किया है...
भारतीय नौसेना इस दौरान 'ट्विन कैरियर ऑपरेशंस' की क्षमता का प्रदर्शन करेगी. इस सम्मेलन में नौसेना कमांडर समुद्री सुरक्षा से संबंधित रणनीतिक गतिविधियों, परिचालन एवं प्रशासनिक मामलों पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से एक मंच पर आएंगे.
यह भी पढ़ें: ISRO चीफ एस सोमनाथ को कैंसर, Aditya-L1 की लॉन्चिंग के दिन चला पता, लेकिन...
यह कॉन्फ्रेंस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि लगातार बदलती हुई भू-राजनीतिक परिस्थितियों, आंचलिक चुनौतियों और इस क्षेत्र में मौजूदा अस्थिर समुद्री सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की जाए. समस्याओं का समाधान निकाला जा सके. यहां नौसेना के भविष्य के ऑपरेशंस और मिशन तय किया जाएगा.
राजनाथ सिंह इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे. सम्मेलन के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के प्रमुखों के अलावा नौसेना के कमांडर रहेंगे. वे देश में तथा भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और तत्परता बढ़ाने के अन्य उपाय भी ढूंढेंगे.
यह भी पढ़ें: तीन युद्धों में पाकिस्तान को खून के आंसू रुला चुका है 'जश्न-ए-अंबानी' के लिए चर्चा में आया जामनगर
पिछले छह महीनों में इजरायल-हमास के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हिंद प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं. व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ-साथ समुद्री डकैती की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. भारतीय नौसेना ने इन खतरों का करारा जवाब दिया है.
नौसेना कमांडरों का सम्मेलन भारतीय नौसेना ऐसा कार्यक्रम है, जो तेजी से बदल रहे समुद्री माहौल के बीच नौसेना के भविष्य की दिशा तय करने के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगा. यह सम्मेलन रणनीतिक स्पष्टता, परिचालन उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने में मदद करेगा.