
आज एक ऐसे लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसकी हिम्मत और कोशिश की मिसालें सारी दुनिया दे रही हैं. सोनिपत के रहने वाले मोहित को महज 11 साल की उम्र में कैंसर के कारण अपना एक पैर खोना पड़ा. उनके परिवार वाले और दोस्तों को लगने लगा कि मोहित का भविष्य पूरी तरह से खत्म हो चुका है और वह बिस्तर से कभी नहीं उठ पाएंगे.
लेकिन बचपन से बॉडी बिल्डर बनने का ख्वाब देखने वाले मोहित कहां इतनी जल्दी हार मानने वाले थे. उन्होंने हिम्मत जुटाई और शुरू कर दी बॉडी बिल्डर बनने की तैयारी.
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...जब शुरू की प्रैक्टिस
एक पैर के सहारे बॉडी बिल्डर बनने की तैयारी शुरू करना सच में नामुमकिन सा था. लेकिन मोहित ने अपनी मेहनत और लगन से उन लोगों का मुंह बंद कर दिया जिन्हें लगता था कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे.
...जब जीते कई मेडल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में ही मोहित ने नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप में 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए.
... जब पता चला बोन कैंसर के बारे में
जिस उम्र में बच्चा दुनिया को समझने की कोशिश करता है उस उम्र मोहित एक ऐसी बीमारी के चपेट में आ गए थे ,जिससे बच निकलना मुश्किल था. साल 2009-10 में 11 साल की उम्र में मालूम चला कि मोहित बोन कैंसर हो गया है. उनके पैर में अधिक दिक्कत आने के कारण दिल्ली स्थित भारतीय रेलवे के सेंट्रल हॉस्पिटल में एक पैर काटना पड़ा.
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जिसके बाद उनका परिवार परेशान हो गया. मोहित ने 2010 में कृत्रिम पैर (Prosthetic leg) लगवाया, लेकिन साल 2015 में दूसरा पैर फिसलने के कारण कृत्रिम पैर भी गंवा दिया.
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कृत्रिम पैर गंवाने के बाद भी मोहित का हौसले में जरा सा भी फर्क नहीं पड़ा. उन्होंन अपना हौसला बनाए रखा और एक पैर पर ही चलने की प्रैक्टिस की. आज मोहित एक पैर से ही पूरा बैलेंस बनाकर चलते हैं और पूरे जोश के साथ बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप में हिस्सा लेते हैं. बॉडी बिल्डिंग में हिस्सा लेने के लिए उसके गुरु संपत सिंह ने प्रेरित किया था.