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बॉलीवुड

जब सांवली रंगत की वजह से नहीं मिले रोल, रत्ना पाठक शाह ने बताया कैसे मिली सक्सेस

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST
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गुजराती हिंदू परिवार में जन्मीं रत्ना, जिसकी मां फिल्मी दुनिया की जानी- मानी अभिनेत्री रहीं, पर बेटी को इस फील्ड में आने का एक पर्सेंट शौक नहीं. हां बैकस्टेज कैमरे के पीछे इन्हें ज्यादा मजा आता था. पर इन्हें खुद को ही कहां पता था कि एक्टिंग की फील्ड में ही इनका करियर उड़ान भरेगा. 

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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एक्टिंग सीखने के बाद जब रत्ना वापस मुंबई आईं, तब इनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह से हुई. नसीर ने रत्ना को एक्टिंग का ऐसा चस्का लगाया कि एक्ट्रेस ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

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हालांकि, रत्ना का इतना लंबा सफर आसान नहीं रहा. इन्होंने अपने हिस्से के उतार- चढ़ाव देखे. शुरुआत रत्ना ने फिल्मों से की. इनकी डेब्यू फिल्म थी 'मंडी', जिसमें एक्ट्रेस ने मालती देवी का रोल निभाया था. और इसी साल रत्ना ने एक ब्रिटिश फिल्म भी की, जिसमें वह शशि कपूर के साथ नजर आईं. फिल्म का नाम था 'हीट एंड डस्ट'. 

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तकरीबन दो साल रत्ना ने फिल्में कीं, पर इसमें इन्हें न तो कुछ खास रोल ऑफर हुए और न ही दर्शकों के बीच यह अपनी कुछ खास पहचान बना पाईं. पर एक्टिंग इतने समय में रत्ने के लिए पैशन बन गई थी. पैशन से ज्यादा प्रोफेशन, क्योंकि उन्हें इस काम के पैसे मिलने लगे थे. नसीरुद्दीन के साथ रत्ना एक्टिंग प्रैक्टिस करती रहीं और फिर साल 1980 में एक्ट्रेस ने टीवी की दुनिया में कदम रखा. 

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17 साल टीवी की दुनिया में काम किया. अपना दबदबा बनाया. घर- घर में पहचान बनाई. हालांकि, बीच- बीच में रत्ना ने कुछ ब्रिटिश फिल्में भी कीं, पर टीवी पर एक्ट्रेस का मेन फोकस रहा. 

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पिंकविला को दिए इंटरव्यू में रत्ना पाठक ने कहा था, "टीवी ने मेरे करियर को बचाया है. इस छोटे पर्दे की दुनिया ने मुझे घर- घर में पहुंचाया. 'फिल्मी चक्कर', 'इधर- उधर' के बाद 'साराभाई वर्सेस साराभाई' ने मुझे काफी पॉपुलर किया. हालांकि, मेरे साथ एक अच्छी चीज ये हुई कि मुझे टिपिकल रोल्स नहीं करने पड़े. डेली सोप में जिस तरह की टिपिकल कहानियां उस जमाने में दिखाई जा रही थीं, उसका मैं हिस्सा नहीं रही. मैंने जो भी किरदार किया, बहुत हटकर किया. डीसेंटली किया." 

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"टीवी की एक अच्छी बात यह रही कि यहां हर तरह के इंसान को काम मिलता था. फिर वह देखने में कैसे भी क्यों न हो. उसकी कद- काठी, स्किन कलर, बाल, या फिर यूं कह दीजिए कि वह किसी भी परिवार के ताल्लुक रखता हो, उसे काम मिल रहा था. वह काम करता था. घर- घर में पहचाना जाता था."

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हालांकि, रत्ना ने अपने हिस्से के रिजेक्शन्स भी झेले. एक्ट्रेस ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने, मेरी फिगर को लेकर, स्किन कलर को लेकर, अच्छे न दिखने को लेकर कई बार रिजेक्शन्स झेले. ऑडिशन देती थी तो मुझे कुछ न कुछ कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था. क्योंकि, मैं एक टिपिकल हीरोइन के फॉर्मेट में सेट नहीं होती थी. रिजेक्शन्स तो मुझे एक बार नहीं, न जाने कितनी बार मिले हैं. पर मुझे फर्क नहीं पड़ा. मुझे काम मिला, अच्छा काम मिला और मैंने अपनी अलग पहचान मिलाई."

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रत्ना ने साल 2002 में टीवी को थोड़ा साइडलाइन कर फिल्मी दुनिया में वापसी की. फिल्म का नाम था 'एंकाउंटर'. कुछ- कुछ काम रत्ना फिल्मों में करती रहीं, पर आज के समय में रत्ना फुल्ली बॉलीवुड को अपनी लाइफ डेडीकेटेड कर चुकी हैं. टीवी में एक्ट्रेस अब नजर नहीं आती हैं. पर जितना भी हो, रत्ना बड़े पर्दे पर बहुत बेहतरीन काम कर रही हैं. 

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हालांकि, रत्ना ने कुछ महीनों पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि उम्र ज्यादा होने के चलते अब उनके पास कुछ खास रोल्स आ नहीं रहे हैं. साथ ही नसीरुद्दीन शाह जिस तरह से मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं, उससे रत्ना को डर लगता है कि कहीं किसी सुबह उनके घर के बाहर लोग पत्थर मारने के लिए खड़े न मिलें. वह नसीरुद्दीन को कुछ भी किसी भी मामले से कहने से रोकती हैं, पर एक्टर रुकते नहीं. (photos- ratna pathak shah, instagram)

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