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Ramayana 18th may update: अयोध्या वापस नहीं लौटे राम-सीता, राजा दशरथ का हुआ निधन

टीवी सीरियल रामायण के हालिया एपिसोड में दिखाया गया कि सुमंत वन से खाली रथ लेकर लौटे हैं और ये जानकर कि श्रीराम, सीता और लक्ष्मण उनके साथ नहीं आये, राजा दशरथ बेहद दुखी हो गए हैं.

टीवी सीरियल रामायण से दशरथ टीवी सीरियल रामायण से दशरथ
पूजा त्रिवेदी
  • मुंबई,
  • 19 मई 2020,
  • अपडेटेड 9:36 AM IST

लॉकडाउन में दूरदर्शन के बाद स्टार प्लस पर रामानंद सागर की रामायण का री-टेलिकास्ट किया जा रहा है. प्रशंसक फिर से भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए हैं. हालिया एपिसोड में दिखाया गया कि सुमंत वन से खाली रथ लेकर लौटे हैं और ये जानकर कि श्रीराम, सीता और लक्ष्मण उनके साथ नहीं आये, राजा दशरथ बेहद दुखी हो जाते हैं.

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उधर मंथरा आकर रानी कैकई को बताती है कि खुशखबरी है, सब ठीक हो गया क्योंकि सुमंत अकेले ही लौटे हैं. श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वन में चले गए हैं. साथ मंथरा ये बताती है कि राजा दशरथ ये सुनकर एकदम चुपसे हो गए हैं और बस राम-राम का नाम जप रहे हैं. राजा दशरथ की पीड़ा बढ़ती जा रही है. उन्हें रह रहकर राम की याद आ रही है, वे अचानक उठते हैं और कहते हैं कि उन्हें कुछ दिख नहीं रहा ऐसे में रानी कौशल्या और रानी उर्मिला उनकी देखभाल में लग जाती हैं. राजा दशरथ कहते हैं कि मरने वाले को कुछ दिखाई नहीं देता है और उनके साथ भी यही हो रहा है.

राजा दशरथ को सता रही पुत्र राम की याद

राजा दशरथ ने जीने की इच्छा ही छोड़ दी है. फिर राजा दशरथ रानी कौशल्या को बताते हैं कि उन्हें एक श्राप मिला था जो श्रवण कुमार के अंधे पिता ने दिया था. राजा दशरथ को विवाह से पहले ये श्राप मिला था, जब राजा दशरथ रात के समय शिकार पर निकले थे. उस दौरान राजा दशरथ जानवर समझकर श्रवण कुमार पर निशाना लगा देते हैं जिससे श्रवण कुमार घायल हो जाते हैं. श्रवण कुमार को तीर लगता है , घायल अवस्था में श्रवण कुमार बताते हैं कि उनके माता-पिता अंधे हैं और मैं उनके लिए जल लेने आया था, और साथ ही श्रवण कुमार, राजा दशरथ से उनके अंधे माता-पिता से जाकर अपने पाप का प्राश्चित करने को कहते हैं और जल भी पिलाने को कहते हैं.

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राजा दशरथ जल लेकर श्रवण कुमार के माता-पिता के पास जाते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनका बेटा गलती से उनके तीर से मर गया है. ये जानकर श्रवण कुमार के पिता क्रोधित हो जाते हैं और बेटे के ग़म में श्रवण कुमर की माता उसी समय अपने प्राण त्याग देती है. क्रोध में श्रवण कुमार के पिता, राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि राजा दशरथ भी पुत्र वियोग में तड़प-तड़प कर मरेगा और श्रवण कुमार के पिता भी प्राण त्याग देते हैं.

राजा दशरथ की मृत्यु से दुखी हुआ अयोध्या

अब राजा दशरथ को यही श्राप याद आ रहा है और देखते ही देखते महाराज अपने अंतिम समय मे अपने पुत्र राम की छवि देखते हैं. महल में राजा दशरथ की मृत्यु हो जाती है. रानी कौशल्या और उर्मिला रोने लगती हैं. महल में दुख की लहर दौड़ पड़ती है. वहां वन में श्रीराम का मन विचलित हो रहा है, उन्हें किसी अनहोनी का आभास हो रहा है और उनके मुख से पिता निकल जाता है और वे ये बात लक्ष्मण से कहते हैं. वे अपने पिताश्री की लंबी आयु की कामना करते हैं.

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उधर अयोध्या में राजा दशरथ की मृत्यु के पश्चचात उनकी अंतिम विदाई हो रही है. सभी आकर उनके अंतिम दर्शन कर रहे हैं और उनका दुख जाहिर कर रहे हैं. गुरुदेव कहते हैं कि राजा दशरथ का दाह संस्कार उनके पुत्र करेंगे परंतु श्रीराम, लक्ष्मण वन में हैं और भरत, शत्रुघ्न अपने ननिहाल में. ऐसे में भरत और शत्रुघ्न को जल्द से जल्द बुलाया जाता है.

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साथ ही अब दुविधा ये है कि राजा दशरथ के बिना राज गद्दी कौन संभालेगा. गुरुदेव कहते हैं कि राज गद्दी उनका पुत्र भरत संभालेगा.

वहां भरत, शत्रुघ्न को लेने श्रीधर पहुंचते हैं और बताते हैं कि उन्हें तुरंत चलना होगा और दोनों भाई अयोध्या की ओर निकलते हैं.

पिता के निधन की खबर सुन उड़ गए भरत के होश

परंतु अयोध्या पहुंचते ही मंथरा, भरत को रानी कैकई के पास ले जाती हैं और उनकी मां को विधवा के रूप में देख भरत के होश उड़ जाते हैं. भरत अपने मां से इस अवतार का कारण पूछते हैं, रानी कैकई अपने बेटे भरत को बताती है कि राजा दशरथ अब इस दुनिया में नहीं रहे, ये सुनकर भरत को बहुत धक्का लगता है. वह अपनी माता कैकई से पूछते हैं कि पिताश्री के आखिरी बोल क्या थे. उसपर कैकई कहती हैं कि वे सिर्फ राम को पुकार रहे थे इसपर भरत शकित रह जाता है कि भईया राम भी पिताश्री के अंतिम समय में उनके साथ नहीं थे, तभी कैकई अपने पुत्र भरत को बताती हैं कि राम वन में हैं जिसे सुनकर भरत भौचक्का रह जाते हैं. आगे के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि कैसे भरत अपनी मां कैकई का विरोध करते हैं.

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