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Agenda Aajtak 2019: निर्भया की मां बोलीं- लड़ाई लड़ते-लड़ते मैं खुद एक सवाल बन गई

एजेंडा आजतक के आठवें संस्करण के पहले दिन पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक सत्र में निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि आज वही तारीख (16 दिसंबर) है. 7 साल बेहद संघर्ष के साथ लड़ाई लड़ी. लेकिन कहीं न कहीं आज भी मैं 2012 में ही खड़ी हूं. इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं.

निर्भया की मां आशा देवी (फोटो-चंद्रदीप कुमार/इंडिया टुडे) निर्भया की मां आशा देवी (फोटो-चंद्रदीप कुमार/इंडिया टुडे)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

  • इंसाफ के लिए आज भी कहीं न कहीं 2012 में ही खड़ी हूंः आशा देवी
  • इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया

'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के पहले दिन ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि आज वही तारीख (16 दिसंबर) है. 7 साल बेहद संघर्ष के साथ लड़ाई लड़ी. लेकिन कहीं न कहीं आज भी मैं 2012 में ही खड़ी हूं. आज भी वहां खड़ी हूं. मुझे इंसाफ चाहिए. इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं.

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निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, 'मुझे इंसाफ चाहिए. कहीं न कहीं आज भी मैं 2012 में ही खड़ी हूं क्योंकि आज भी इंसाफ चाहिए. जवाब देते-देते, इंसाफ मांगते-मांगते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं.'

निर्भया की क्या गलती थीः आशा देवी

उन्होंने कहा, '2012 में जो घटना हुई उसमें निर्भया की क्या गलती थी. हमारी क्या गलती थी कि आज भी हमें इंसाफ नहीं मिला. आज भी हफ्ते-10 दिन के अंदर जिन बच्चियों के साथ घटनाएं हुईं और उनको जिंदा जला दिया गया. उनकी क्या गलती है.'  उन्होंने कहा कि हमारी क्या गलती है कि हमें 2012 से कोई इंसाफ नहीं मिला.

आशा देवी ने कहा कि जब भी ऐसी कोई घटना घटती है तो हर कोई कहता है कि फास्ट ट्रैक बनाएंगे, कानून बनाएंगे. दोषियों को सजा मिलेगी. कई कानून भी बने हैं, लेकिन क्या हम इन घटनाओं को रोक पाने में कामयाब हुए हैं. क्या हम कोई समाधान निकाल सके हैं कि आगे भविष्य में ऐसा नहीं होगा. जल्द से जल्द लोगों को इंसाफ मिलेगा.

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उन्होंने कहा कि 7 साल की लड़ाई में मुझे एहसास हुआ कि पिछले15 साल में सिर्फ एक को फांसी हुई. आखिर कब सुधार आएगा.

इसी सत्र में बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को दहलाने वाला वो दिन था जब निर्भया की मौत हुई. उस समय हर किसी को इसका दुख था. पिछले 50 साल से मैं महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को देख सुन रही हूं और उनके अधिकारों के लिए लड़ भी रही हूं. लेकिन ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए. मामला लंबा नहीं खींच जाना चाहिए.

'एजेंडा आजतक' का आठवां संस्करण

पिछले 19 साल से लगातार भारत का नंबर वन न्यूज चैनल रहे 'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण का आगाज सोमवार को हो गया. एजेंडा आजतक की शुरुआत सोमवार सुबह वंदे मातरम से हुई. इसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया.

एजेंडा आजतक अन्य इवेंट्स की नींवः कली पुरी

वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने एजेंडा आजतक के महत्व के बारे में बताते हुए इस आयोजन को अपने सभी कार्यक्रमों की नींव बताया. उन्होंने कहा कि सभी तरह के विचारों को बगैर किसी दबाव और रोक-टोक के साथ आपके सामने प्रस्तुत करना हमारा प्रमुख एजेंडा है. हिंदी जगत के महामंच का यह आठवां संस्करण है. यह वो एजेंडा आजतक है जिसने दूसरे और कार्यक्रमों का आयोजन किया है. एजेंडा आजतक का पहला एडिशन 2012 में हुआ था. उस समय आजतक का कोई और इवेंट नहीं था. इस एक इवेंट ने नक्शा ही बदल दिया.

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दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित दो दिवसीय 'एजेंडा आजतक' 16 और 17 दिसंबर 2019 चलेगा. एजेंडा आजतक का मकसद है, उस एजेंडे को लोगों के सामने लेकर आना जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के विचारकों और चिंतकों की सोच है. ये देश में देश की आवाज का एजेंडा होगा.

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