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दिल्ली एक बार फिर जंग का अखाड़ा बन सकती है. केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार नई मुद्दे पर फिर से आमने-सामने हो सकते हैं. दरअसल, एंटी करपशन ब्रांच ने दिल्ली सरकार के विजिलेंस डिपार्टमेंट को नोटिस भेजा है.
एसीबी प्रमुख मुकेश मीणा ने विजिलेंस डिपार्टमेंट के प्रमुख एस.के. जैन को पत्र लिखा है. पत्र में 1031 (एंटी करप्शन हेल्पलाइन) को एसीबी को सौंपने को कहा गया है. ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दी गई है.
ये भी लिखा नोटिस में
नोटिस में कहा गया है की दिल्ली सरकार ने एंटी करप्शन हेल्प लाइन नंबर 1031 पर काफी पैसे खर्च किए हैं लेकिन दिल्ली सरकार कोई भी कॉल एसीबी को नहीं दे रही है. एसीबी ने 1031 को देखने वाले ऑफिसर के नाम मांगे है और कहा हैं कि हम लीगल एक्शन लेंगे. एसीबी इस मामले पर एफआईआर भी दर्ज कर सकती है.
'एसीबी का कंट्रोल छिन जाने का है खेद'
इससे पहले केजरीवाल ने कहा कि एक साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें उस बात का सबसे ज्यादा खेद है कि एंटी करप्शन ब्रांच उनकी दायरे में नहीं है. AAP सरकार के 49 दिनों के कार्यकाल को याद करते हुए केजरीवाल ने कहा, 'उन 49 दिनों में हमने दिल्ली के अंदर एसीबी के जरिए करीब 50 अधिकारियों पर कार्रवाई की थी. पुलिसवालों ने रिश्वत लेना बंद कर दिया था. लेकिन बीते साल 8 जून को केंद्र सरकार ने मुकेश मीणा को एसीबी चीफ बनाकर कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया.'
उन्होंने कहा कि 49 दिनों के दौरान हमने मुकेश अंबानी से लेकर पूर्व सीएम शीला दीक्षित तक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन अब एसीबी का कंट्रोल केंद्र के पास है. अब डीडीए और एनडीएमसी के भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ भी एक्शन नहीं ले सकते.