नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के 30 दरवाजे हुए बंद

बांध की वजह से रोज 1450 मोगावोट बिजली पैदा होगी. 68 लाख हेक्टेयर जमीन को फायदा होगा. बांध के दरवाजे बंद करने को लेकर मुख्यमंत्री विजय रुपानी का कहना है कि, बांध के बंद दरवाजों ने गुजरात के विकास के दरवाजे खोल दिए हैं.

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गुजरात के सीएम विजय रुपानी गुजरात के सीएम विजय रुपानी

गोपी घांघर

  • अहमदाबाद,
  • 17 जून 2017,
  • अपडेटेड 10:58 PM IST

गुजरात की जीवन डोर मानी जाने वाले नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के लिये शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा. आज ही सरदार सरोवर बांध के 30 दरवाजों को बंद किया गया है. दरअसल 1961 में नर्मदा पर सरदार सरोवर बांध की नीव उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल की परिकल्पना के तौर पर देखा जाता है.

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हालांकि इतने साल बाद आज सरदार सरोवर बांध का काम खत्म हुआ और इस पर बने 30 दरवाजों को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बंद किया. सरदार सरोवर बांध का काफी स्वर्णिम इतिहास रहा है.

- 1981 में सरदार सरोवर बांध का काम शुरू किया गया था.
- 1989 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते 85 मीटर तक काम पहुंचा, नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान साल 2001 में 90 मीटर तक बांध का काम पहुंचा था. जिसके बाद 2004 में सरदार सरोवर बांध का काम 110 मीटर तक पहुंचा.
- 2006 में उस वक्त चल रहे विरोध के सामने नरेन्द्र मोदी ने उपावस कर बांध की ऊंचाई को 121 मीटर तक पहुंचाने का काम किया. जिसके बाद नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहला काम बांध पर दरवाजा लगवाना रहा. यह काम 9 महीने के अंदर 2016 में खत्म किया गया. अब यह दरवाजा बंद किया गया है. अब बांध की ऊंचाई 138.68 मीटर हो गयी है.

बांध की वजह से रोज 1450 मोगावोट बिजली पैदा होगी. 68 लाख हेक्टेयर जमीन को फायदा होगा. बांध के दरवाजे बंद करने को लेकर मुख्यमंत्री विजय रुपानी का कहना है कि, बांध के बंद दरवाजों ने गुजरात के विकास के दरवाजे खोल दिए हैं तो वहीं कांग्रेस ने इसे बीजेपी का चुनावी हथकंडा बताया है.

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