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14 सालों से गुजरात दंगों का चेहरा बने अंसारी की अपील, बंद करो मेरी तस्वीर का इस्तेमाल

कुतुबुद्दीन अंसारी  की शिकायत है कि राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए उनका इस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी जिंदगी काफी मुश्किल होती जा रही है.

कुतुबुद्दीन अंसारी कुतुबुद्दीन अंसारी
सुरभि गुप्ता
  • अहमदाबाद,
  • 12 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

पिछले चौदह सालों से गुजरात दंगों का चेहरा बने कुतुबुद्दीन अंसारी ने राजनीतिक दलों से उनकी तस्वीर का इस्तेमाल बंद करने की अपील की है. अंसारी ने कहा कि उसकी जिंदगी इस राजनीतिक खेल में काफी मुश्किल हो चुकी है.

गुजरात में हुए 2002 के दंगों का चेहरा बने कुतुबुद्दीन अंसारी का मानना है कि असम और पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने उनकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल किया है. 14 सालों से गुजरात दंगों के लिए अंसारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा है. आखिर में अंसारी ने कह ही दिया कि अब मेरा इस्तेमाल बंद करो.

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काश मैं 2002 में ही मारा जाता
कुतुबुद्दीन अंसारी उस वक्त 29 साल के थे, जब आंखों में आंसू लिए दया और जिंदगी की भीख मांगते एक नौजवान की तस्वीर 2002 दंगे की परिभाषा बन गई. अंसारी ने कहा, 'मैं अब 43 साल का हूं और बीते 14 सालों से राजनीतिक दलों, बॉलीवुड और यहां तक कि आतंकी संगठनों ने मेरी उस तस्वीर का गलत तरीके से इस्तेमाल किया है. काश, मैं उसी दौरान मर जाता क्योंकि मैं अपने बच्चों को इस सवाल का जवाब नहीं दे सकता कि आखिर क्यों मेरी रोती और भीख मांगती हुई तस्वीर पेश की जाती है.'

चुनावी रणनीति के तहत तस्वीर का इस्तेमाल
असम और पश्चिम बंगाल के विधान सभा क्षेत्रों में कुतुबुद्दीन की तस्वीर का एक रणनीति के तहत इस्तेमाल किया गया है. तस्वीर के साथ कुछ ऐसे कैप्शन दिए गए- 'क्या मोदी के गुजरात का मतलब विकास है? क्या आप असम को दूसरा गुजरात बनाना चाहते हैं? फैसला आपका है. असम में कांग्रेस का विकल्प कांग्रेस ही है.'

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गुजरात में शांति से रहने की चाहत
दर्जी के तौर पर बिरजूनगर में काम करने वाले अंसारी की आमदनी इतनी भी नहीं है कि अपनी पत्नी और तीन बच्चों को अच्छी तरह से पाल सके. उनकी सबसे बड़ी शिकायत है कि राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए उनका इस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी जिंदगी काफी मुश्किल होती जा रही है. अंसारी ने कहा कि वे गुजरात में शांति से रहना चाहते हैं.

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