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Rapid Rail: जल्द दौड़ेगी भारत की सबसे तेज चलनी वाली ट्रेन, जानिए मेट्रो से कैसे अलग होगी रैपिड रेल

वरुण सिन्हा
  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2022,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST
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RRTS Train: देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम का काम तेजी से चल रहा है. माना जा रहा है, 2025 तक आरआरटीएस ट्रेन का काम पूरा हो जाएगा. ये ट्रेन दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ के बीच 180 किमी / घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. ऐसे में ये रेल बाकी से बेहतर कैसे हो, मेट्रो के मुकाबले रैपिड रेल में व्यवस्थाओं में क्या-क्या परिवर्तन किए जा सकते हैं, इसे लेकर प्रयास किए जा रहे हैं.

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India's First Rapid Rail: आरआरटीएस ट्रेन (RRTS Train) भारत की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन होगी. बता दें, इस ट्रेन के कोचों का निर्माण भारत में हुआ है. ये 100 प्रतिशत मेक इन इंडिया परियोजना है, जिसे हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को सौंपा गया था.

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RRTS Train: आरआरटीएस (RRTS) को दो कोचों  (प्रीमियम और स्टैंडर्ड) में बांटा जाएगा और दोनों कोचों का टिकट अलग-अलग होगा. स्टैंडर्ड कोच के टिकट वाले यात्री प्रीमियम कोच से यात्रा नहीं कर सकेंगे. 

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India's First Rapid Rail: एनसीआरटीसी (NCRTC) द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं कि यात्री लिए गए कोच टिकट के हिसाब से ही यात्रा करें. प्रवेश के समय में एक ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन डोर/टोकन स्कैन डोर होगा, टिकट टू प्रीमियम कोच वाले यात्री कोच में प्रवेश करने से पहले अपने टिकट को दो बार स्कैन करेंगे. 

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Delhi-Meerut Rapid Rail: अगर हम मेट्रो ट्रेन से इसकी तुलना करें, तो मेट्रो ट्रेन में ऐसा कोई प्रीमियम कोच नहीं है, लेकिन इसमें महिलाओं के लिए एक अलग कोच होता है. हालांकि, कई बार महिला कोच में पुरुष यात्रियों को देखा जाता है, जहां सीआरपीएफ को शामिल होना पड़ता है. रैपिड ट्रेन में इस तरह की परेशानी से बचने के लिए एनसीआरटीसी की ओर से पहले ही सख्त नियम बनाए जा चुके हैं. 

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Delhi-Meerut Rapid Rail: जैसे मेट्रो में टोकन केवल एक बार स्कैन किया जाता है, यहां रैपिड ट्रेन के मामले में टोकन को फिर से प्लेटफॉर्म पर स्कैन किया जाएगा ताकि कोई यात्री अपने कोच को इंटरचेंज न करे. 

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RRTS Train: एक स्टैंडर्ड कोच वाला यात्री दूसरे स्टैंडर्ड कोच में जा सकता है लेकिन प्रीमियम कोच में नहीं. प्रीमियम कोच का टिकट स्टैंडर्ड कोच की तुलना में थोड़ा अधिक होगा और मेट्रो की तरह महिलाओं के लिए एक अलग कोच होगा जो स्टैंडर्ड श्रेणी के अंतर्गत आएगा. प्रीमियम कोच में हवाईअड्डों की तरह प्रीमियम लाउंज भी होगा जो बिजनेस क्लास की सुविधा प्रदान करेगा. 

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आरआरटीएस (RRTS) का पहला ट्रेनसेट 13 जून को गाजियाबाद के दुहाई डिपो पहुंच गया है. इस ट्रेनसेट को गुजरात के सावली में स्थित मेन्यूफैक्चरिंग प्लांट से ट्रेलर पर लाद कर सड़क मार्ग द्वारा लाया गया है. इस ट्रेनसेट के सभी 6 डिब्बे अलग-अलग ट्रेलर पर लाद कर लाए गए. दुहाई डिपो पहुंचने पर इन्हें क्रेन की सहायता से उतारा गया और अब आने वाले दिनों में डिपो में ही इस पूरी ट्रेन को असेम्बल किया जाएगा.

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दुहाई डिपो में इनके लिए ट्रैक बनकर तैयार हो चुके हैं और ट्रेन की टेस्टिंग के लिए भी पूरी तैयारी है. आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए दुहाई डिपो में ही प्रशासनिक भवन बनाया गया है. भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के पहले चरण का काम लगभग पूरा हो गया है. करीब 17 किमी का फर्स्ट फेस है, जिसको 2023 तक शुरू करना है. हालांकि, अधिकारियों की मानें तो बहुत जल्द इस रूट पर ट्रायल शुरू हो जाएगा. 

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