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चीनी सेना को चींटियों जैसे मसल देगी 'Mountain Man' की ये आर्मी, बेहद टफ होती है ट्रेनिंग

ऋचीक मिश्रा
  • पन्नागढ़ (प. बंगाल),
  • 16 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST
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चीन के घुसपैठी सैनिकों को जिन फौजियों ने पीटा वो J & K राइफल्स, सिख और जाट रेजिमेंट के थे. लेकिन भारतीय सेना (Indian Army) के पास एक ऐसी टीम है जो पहाड़ों पर युद्ध के लिए ही प्रशिक्षित हुई है. ये चीनियों को चींटी की तरह मसल सकते हैं. उनसे लोहा ले सकते हैं. ये भारतीय फौज के Mountain Warriors हैं. 

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ये जवान हैं भारतीय सेना के माउंटेन स्ट्राइक कोर (Mountain Strike Corps) से. इसे 17वीं कोर (XVII Corps) भी बुलाया जाता है. लेकिन प्यार से फौजी इसे ब्रह्मास्त्र कोर (Brahmastra Corps) बुलाते हैं. यह साल 2013 से लगातार सक्रिय है. इनकी ट्रेनिंग बेहद कठिन होती है. (फोटोः गेटी)

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माउंटेन स्ट्राइक कोर के जवानों को क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट, कोल्ड वेदर वॉरफेयर, कंबाइंड आर्म्स, घुसपैठ रोधी अभियान, आतंकवाद रोधी अभियान, फॉर्वर्ड ऑब्जरवर, जंगल वॉरफेयर, माउंटेन वॉरफेयर, हमला, रेड, जासूसी और शहरी वॉरफेयर में प्रशिक्षित होते हैं. (फोटोः इंडिया टुडे)

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माउंटेन स्ट्राइक कोर का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के पन्नागढ़ में है. यह पूर्वी कमांड (Eastern Command) के अंदर आता है. माउंटेन स्ट्राइक कोर में फिलहाल दो डिविजन हैं. 23 इन्फैन्ट्री डिविजन. यह रांची में स्थित है. दूसरी 59 इन्फैन्ट्री डिविजन जो पन्नागढ़ में है. इसमें छह ब्रिगेड्स है. तीन इन्फैन्ट्री एक-एक इंजीनियरिंग, एयर डिफेंस और आर्टिलरी ब्रिगेड है. (फोटोः रॉयटर्स)
 

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माउंटेन स्ट्राइक कोर का मैस्कट Snow Leopard है. जो ताकत, बहादुरी और चालाक शिकारी होता है. माउंटेन कोर का मुख्य काम है अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश में चीनियों से सीमा की सुरक्षा. क्योंकि तिब्बत के साथ भारत की 4057 किलोमीटर लंबी सीमा है. इतनी लंबी सीमा पर सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित जवानों की जरुरत है. वो माउंटेन कोर से बेहतर कोई हो नहीं सकता. (फोटोः रॉयटर्स)

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इस कोर में पहले करीब 1200 ऑफिसर्स और 35 हजार फौजी हैं. लेकिन हमारे जवानों से चीनी ज्यादा थे. इसके बाद माउंटेन कोर में जवानों की संख्या बढ़ाई जाने लगी. प्लान बनाया गया इसमें 90 हजार फौजियों को रखने की. इस कोर को धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है. इसकी ताकत, हथियार, संख्या, सुविधाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं. (फोटोः इंडिया टुडे)
 

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बेहद बर्फीली जगहों पर ये फौजी युद्ध करने में सक्षम होते हैं. ये अपने शरीर को माइनस तापमान के हिसाब से ढालते हैं. कमांडो जैसी ट्रेनिंग होती है इनकी. एक तेंदुए की तरह हमला करने वाले ताकतवर शिकारी हैं. ये स्नो कैमोफ्लॉज पहनते हैं. ताकि बर्फ में दिखाई न पड़ें. (फोटोः रॉयटर्स)

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भारतीय सेना हर सला 100 अधिकारी और 400 नॉन-कमीशन्ड ऑफिसर्स और जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर्स को हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल में ट्रेनिंग के लिए भेजती है. यहां ट्रेनिंग करने वालों को सियाचिन ग्लेशियर के पास सीमा पर तैनात किया जाता है. (फोटोः रॉयटर्स)

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