Advertisement

न्यूज़

LCH in Jodhpur: एयरफोर्स को मिलेंगे स्वदेशी LCH, बेजोड़ है फायर पावर, जानिए चीन-PAK बॉर्डर के लिए क्यों जरूरी?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST
  • 1/8

ये बात तो सबको पता है कि पाकिस्तान और चीन हमेशा ही भारत के लिए मुसीबतें खड़ी करते आए हैं. उनकी हरकतों पर नजर रखने के लिए. मुंहतोड़ जवाब देने के लिए. जरूरी है कि इंडियन एयरफोर्स और आर्मी दोनों ही लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर्स (Light Combat Helicopters) को सीमाओं पर तैनात करे. असल में इन हेलिकॉप्टरों का उपयोग वहां किया जाता है जहां पर फाइटर जेट्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते. (फोटोः IAF)

  • 2/8

दुश्मन को DEAD करना मुख्य लक्ष्यः LCH का मुख्य काम होगा कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू यानी युद्ध के समय अपने सैनिकों को खोजकर उन्हें बचाना. दुश्मन के हवाई डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से नष्ट करना. यानी डिस्ट्रक्शन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस (DEAD). घुसपैठ रोकना (Counter Insurgency). ड्रोन, अनमैन्ड एरियल व्हीकल आदि को मार कर गिराना. अधिक ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के बंकरों को ध्वस्त करना. (फोटोः IAF)

  • 3/8

अपनी कीमत से 17 गुना ज्यादा नुकसान देते हैं दुश्मन कोः रतीय वायुसेना द्वारा जोधपुर एयर बेस पर लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का स्क्वॉड्रन तैनात करने से पूरी पश्चिमी सीमा सुरक्षित हो जाएगी. सीमा पार से कैसी भी नापाक हरकत का मुहंतोड़ जवाब देगा यह हेलिकॉप्टर. यह हेलिकॉप्टर नहीं, आसमान में उड़ती मौत है. सबसे बड़ी बात ये है कि अटैक हेलिकॉप्टर (Attack Helicopters) की जरुरत इसलिए होती है कि आप किसी वीवीआईपी को सुरक्षित कहीं पहुंचा सकें. हथियारबंद होकर निगरानी और जांच कर सकें. एक अनुमान के अनुसार अटैक हेलिकॉप्टर किसी युद्ध की स्थिति में अपन कीमत से 17 गुना ज्यादा कीमत के टारगेट्स को ध्वस्त कर देते हैं. यानी ये काम के हुए. (फोटोः IAF)

Advertisement
  • 4/8

LCH अपने कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टरः लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल वहां किया जाता है जहां पर फाइटर जेट्स की जरुरत नहीं होती. भारत में बना LCH दुनिया का इकलौता अपनी कैटेगरी का सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टर है. ये यह अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकता है. वहां पर हमला कर सकता है. फाइटर जेट से कम रफ्तार में ज्यादा सटीक और घातक हमला करने सक्षम ये होते हैं ये हेलिकॉप्टर. क्योंकि फाइटर जेट ज्यादा गति में उड़ते हैं. उनका इस्तेमाल अलग होता है. सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए ये हेलिकॉप्टर ज्यादा उपयुक्त होते हैं. (फोटोः IAF)

  • 5/8

दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं, रेंज 550 KM: 15.5 फीट ऊंचे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी LCH की की लंबाई 51.10 फीट है. इसे दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं. एक फ्लाइंग करता है तो दूसरा नेविगेशन और हथियार वगैरह देखता है. 550 किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज में यह अधिकतम 268 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. लगातार सवा तीन घंटे उड़ान भर सकता है. इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता हिमालय पर मौजूद चीन सीमाओं की निगरानी में होगी. (फोटोः IAF)

  • 6/8

16,400 फीट की ऊंचाई पर जाने की ताकत: LCH 16,400 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसकी मदद से चीन की हालत पस्त की जा सकती है. क्योंकि अभी दुनिया में इस तरह का कोई हेलिकॉप्टर नहीं है, जो इतनी ऊंचाई पर हिमालय में उड़ सके. इसका कॉकपिट ग्लास से बना है. साथ ही बॉडी फ्रेम कंपोजिट है. यानी इस पर सामान्य असॉल्ट राइफलों की गोलियों का भी असर नहीं होगा. न ही इसके रोटर यानी ब्लेड्स पर. (फोटोः IAF)

Advertisement
  • 7/8

इस हेलिकॉप्टर के आने से होगा यह बड़ा बदलाव: जैसे-जैसे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की तैनाती होती जाएगी. देश में मौजूद पुराने सोवियत संघ के समय के Mi-25 के स्क्वॉड्रन को खत्म कर दिया जाएगा. Mi-35 हेलिकॉप्टरों का आधुनिकीकरण हो रहा है. ताकि उनकी लाइफ बढ़ सके. इनका भी एक स्क्वॉड्रन तो खत्म कर दिया गया है. आमतौर पर एक स्क्वॉड्रन में 17 से 20 हेलिकॉप्टर होते हैं. यानी जहां भी ये हेलिकॉप्टर तैनात होंगे वहां पर दुश्मन हमला करने से पहले कई बार सोचेगा. (फोटोः IAF)

  • 8/8

इस तरह के घातक हथियारों से लैस: लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की चोंच यानी कॉकपिट के ठीक नीचे 20 mm की तोप है. हेलिकॉप्टर में चार हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार एक जैसे या अलग-अलग प्रकार के हथियार लगाए जा सकते हैं. जैसे - चार 12 FZ275 लेजर गाइडेड रॉकेट्स या हवा से हवा में मार करने वाली चार Mistral मिसाइलें. चार ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें. या चार क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम, ग्रेनेड लॉन्चर लगाया जा सकता है. या फिर इन सबका मिश्रण सेट कर सकते हैं. (फोटोः IAF)

Advertisement
Advertisement