
पश्चिम बंगाल ने कई 'फर्जी डॉक्टरों' को गिरफ्तार करने का दावा किया है. ये लोग कथित तौर पर राज्य में विभिन्न सरकारी और प्राइवेट मेडिकल संस्थानों में प्रेक्टिस कर रहे थे. बीते एक महीने में सीआईडी ने राज्य भर से कम से कम 5 लोगों को गिरफ्तार किया है.
'डॉक्टर' शुभेंदु भट्टाचार्य को हावड़ा से गिरफ्तार किया गया है. भट्टाचार्य के खिलाफ डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और फर्जी डिग्रियों के जरिए प्रेक्टिस करने की शिकायत मिली थी. भट्टाचार्य स्थानीय लोगों को झांसा देने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहा था. मरीजों को लुभाने के लिए उसने राष्ट्रपति से अवार्ड मिलने की कथित फोटो भी लगा रखी थी. साथ ही वो इंग्लैंड में रायल कालेजेस ऑफ फिजिशियंस (MRCP) की सदस्यता रखने की शेखी भी बधारता था. पुलिस के मुताबिक भट्टाचार्य किसी और डॉक्टर, अयान घोष के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर रहा था. घोष ने भट्टाचार्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.
ऐसे ही एक और 'डॉक्टर' को इसी हफ्ते दक्षिण कोलकाता में उसके क्लिनिक से गिरफ्तार किया गया. अजय तिवारी नाम का ये 'डॉक्टर' खुद को शहर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल 'कोठारी मेडिकल सेंटर' में 'कंसलटेंट गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट' होने का दावा करता था. तिवारी कथित तौर पर मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया का फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इस्तेमाल कर रहा था. अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक तिवारी बीते 20 साल से इंस्टीट्यूट में मरीजों का इलाज कर रहा था. सीआईडी ने प्रारंभिक जांच के दौरान पाया है कि तिवारी का असम से एमबीबीएस डिग्री हासिल करने का दावा झूठा है और वो असल में कॉमर्स ग्रेजुएट है.
एक और फर्जी डॉक्टर नरेन पांडेय को कोलकाता के जानेमाने प्राइवेट अस्पताल बेले वू में खुद को एलर्जी स्पेशलिस्ट के तौर पर पेश करने की वजह से गिरफ्तार किया गया. सीआईडी अधिकारी खुद को मरीज बता कर पांडे से मिले. पूछताछ के दौरान पांडे ने कबूल कर लिया कि वो ऐलोपैथी का नहीं यूनानी की डिग्री रखता है.
यूनानी प्रैक्टीशनर नाम के आगे डॉ. नहीं लगा सकता
सीआईडी के मुताबिक यूनानी का प्रैक्टीशनर ऐलोपैथी की दवाएं लिखना तो दूर अपने नाम के आगे डॉ. भी नहीं लगा सकता है. ताज्जुब की बात है कि पांडे को बेले वू अस्पताल की ओपीडी में चैंबर भी मिला हुआ था. अपने फेसबुक प्रोफाइल में
पांडे ने खुद को झिन्जियांग मेडिकल यूनिवर्सिटी का डिग्रीधारी बता रखा है.
पांडे के एक मरीज की मां नीता तन्खा ने कहा, 'एक बार मैं अपनी बेटी को बेले वू में डॉक्टर पांडे को दिखाने ले गई थी. बेटी की त्वचा पर कुछ निशान से आ गए थे. पांडे ने कुछ ऐलोपैथी दवाएं लिखीं. शुरुआती नतीजे के बाद समस्या फिर उभर आई. जब दोबारा पांडे के पास गए तो एक दूसरे क्लिनिक में मिलने को कहा गया. हमसे एक सिटिंग के लिए 600 रुपए चार्ज किए गए.'
फर्जी डॉक्टरों की तलाश बीते महीने तब शुरू हुई थी जब सीआईडी ने उत्तरी बंगाल में ऐसे ही दो मेडिकल प्रेक्टिशनर को पकड़ा था. सीआईडी ने खुशीनाथ हलदर और केसर आलम को दो अलग-अलग सरकारी हेल्थ सेंटर से पकड़ा था. खुशीनाथ अलीपुरद्वार में मदारीहाट ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर में तैनात था, वहीं आलम उत्तरी दिनाजपुर के चोपरा ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कार्यरत था.
आलम कोलकाता के रूबी जनरल अस्पताल में भी रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर (RMO) के तौर पर काम कर चुका है. ये अस्पताल कोलकाता के सबसे बड़ा प्राइवेट मेडिकल सेंटर्स में से एक है.
करीब 500 संदिग्ध मेडिकल प्रेक्टिशनर्स की होगी जांच
सीआईडी के मुताबिक राज्य भर में करीब 500 संदिग्ध मेडिकल प्रेक्टिशनर्स जांच के रडार पर हैं. फर्जी डॉक्टरों की धरपकड़ के बीच राज्य मेडिकल काउंसिल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. साथ ही कहा है कि कोई भी संदेहास्पद
गतिविधि दिखने पर उसकी सूचना दें. पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस नेता निर्मल माजी ने कहा, 'मैं सभी से अपील करता हूं कि हमारे पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं. अगर शिकायत सही पाई गई तो हम
एफआईआर दर्ज कराएंगे.'