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शिवसेना को 1992 के बाद अब क्यों याद आए राम?

शिवसेना के मुताबिक जब तीन तलाक और एससी-एसटी पर सरकार अध्यादेश लाकर कानून बना सकती है, तब राम मंदिर मामले में भी सरकार अध्यादेश ला सकती है.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या पहुंच रहे हैं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या पहुंच रहे हैं
देवांग दुबे गौतम
  • नई दिल्‍ली,
  • 24 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:36 AM IST

राम मंदिर का मुद्दा धीरे-धीरे गर्म होता जा रहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शनिवार को अयोध्या पहुंच रहे हैं. इससे पहले ही सैकड़ों शिवसैनिक वहां पहुंच चुके हैं. ऐसा माना जा रहा है कि शिवसेना इस मुद्दे पर बीजेपी को हर तरफ से घेरना चाहती है.

शिवसेना का यह स्पष्ट कहना है कि वह राम मंदिर के नाम पर वोट नहीं मांगेगी लेकिन सवाल भी उठ रहे हैं कि 1992 के बाद शिवसेना को अब भगवान राम इतनी शिद्दत से क्यों याद आए हैं.

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6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद तोड़ दी गई थी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने आगे आकर इसकी जिम्मेदारी ली थी. उन्‍होंने कहा था कि बाबरी मस्जिद का तोड़ा जाना उनके लिए गर्व की बात है. आज हालात ऐसे हो चुके हैं कि बीजेपी और शिवसेना साथ हैं लेकिन शिवसेना, बीजेपी के खिलाफ जहर उगलती रहती है. कभी-कभी ऐसा भी दिखाने की कोशिश होती है कि दोनों साथ में चुनाव नहीं लड़ेंगे और महाराष्ट्र में इनका गठबंधन टूट जाएगा.

बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश!

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवसेना दबाव बनाकर बीजेपी को बैकफुट पर लाना चाहती है जिससे बीजेपी से सीटों का समझौता किया जा सके. अयोध्या में अगर उद्धव को अच्छा रेस्पॉन्स मिलता है तो यूपी में भी सीटों के लिए अपना दावा पेश कर सकते हैं. महाराष्ट्र में कभी शिवसेना को मुख्यमंत्री का पद भी मिला था लेकिन आज के हालात दूसरे हैं. महाराष्ट्र में बीजेपी का मुख्यमंत्री है.

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शिवसेना जिस तरह से राम मंदिर को लेकर मुखर हुई है उससे कहीं न कहीं ये साफ है कि वह अपनी साथी पार्टी बीजेपी के मुद्दे को हथियाने की कोशिश कर रही है. आमतौर पर अब तक बीजेपी ही राम मंदिर को मुद्दा बनाते रही है और 2014 में राम मंदिर को ही मुद्दा बनाकर वह बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि यह मुद्दा शिवसेना का है.  

खुद उद्धव ठाकरे का अयोध्या पहुंचना यह दर्शाता है कि वह बीजेपी को इस मुद्दे पर छोड़ने वाली नहीं है और उसके साथ रहते हुए भी उसको मंदिर के लिए चुनौती देती रहेगी. शिवसेना नेता अरविंद सावंत ने कहा था कि बीजेपी ने 2014 में कश्मीर विवाद, धारा 370 हटाने और अयोध्या में राममंदिर बनाने का वादा किया था. मोदी सरकार को चार साल से ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी निर्माण भी शुरू नहीं हो पाया. यह मामला अभी भी कोर्ट में है. बाबरी मस्जिद गिराने की कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा था. उस वक्त शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे ने इसकी जिम्मेदारी ली थी.

बालासाहेब ठाकरे ने कहा था- बाबरी गिरना गौरव की बात

बता दें कि 1993 में बालासाहेब ठाकरे ने बाबरी मस्जिद गिरने के बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि बाबरी मस्जिद गिरना गौरव की बात थी, शर्म की नहीं. मंदिर मस्जिद के नीचे था. हम मंदिर को ऊपर ले आए. आप इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा, भारत में बाबर या जितने मुस्लिम शासक आए, उन्होंने हमारे सारे मंदिर गिरा दिए और मस्जिदें बना दीं. हमारा कर्तव्य है कि ऐसी मस्जिदों को गिराकर मंदिरों को ऊपर लाया जाए.

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शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि हमने 17 मिनट में बाबरी तोड़ दी तो कानून बनाने में कितना टाइम लगता है? राष्ट्रपति भवन से लेकर यूपी तक बीजेपी की सरकार है. राज्यसभा में ऐसे बहुत सांसद हैं, जो राम मंदिर के साथ खड़े रहेंगे. जो विरोध करेगा, उसका देश में घूमना मुश्किल होगा.'  

सरकार संसद में कानून बनाए

मोदी सरकार जब अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में है तो शिवसेना अक्सर बीजेपी को उसके वादे की याद दिलाती रही है. शिवसेना भव्य राम मंदिर बनाने के लिए संसद में कानून बनाने की मांग कर चुकी है.

शिवसेना के मुताबिक अयोध्या में राम मंदिर का मामला कोर्ट के माध्यम से हल नहीं हो सकता. कोर्ट का फैसला लोग नहीं मानेंगे, क्योंकि यह आस्था से जुड़ा मामला है. ऐसे में अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए केंद्र सरकार को संसद में कानून बनाना चाहिए. शिवसेना का कहना है कि सरकार अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए संसद में कानून बनाए तो शिवसेना सरकार का पूरा समर्थन करेगी. 

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