
दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने में नाकाम रहने पर बुधवार को दिल्ली पुलिस की खिंचाई की जबकि कैमरे लगाने की शुरूआत 13 साल पहले हुई थी.
अदालत ने इस मामले में पुलिस के जवाब को 'पूरी तरह से धूल झोंकने वाला' करार दिया और कहा कि बल को यह भी नहीं मालूम है कि उसके द्वारा लगाए गए कैमरे अभी तक काम कर रहे हैं या नहीं.
न्यायमूर्ति बी डी अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की पीठ ने कहा कि जहां तक सीसीटीवी कैमरों का सवाल है, दिल्ली पुलिस द्वारा लिया गया समय उत्साहजनक नहीं है. उन्होंने 2002-2004 में 190 में से 108 पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए .
पीठ ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि 13 साल के बाद भी दिल्ली पुलिस बिना किसी समयसीमा के प्रायोगिक परियोजना शुरू करना चाहती है.
पीठ ने कहा कि पुलिस को यह भी नहीं मालूम है कि 108 पुलिस स्टेशनों में लगाए गए कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं. पीठ ने उनके काम नहीं करने के कारणों को लेकर भी सवाल किया.
अदालत ने कहा, 'अगर दिल्ली में किसी महिला के खिलाफ कुछ होता है , तो इसका मतलब है कि महिला ही जिम्मेदार है. दिल्ली पुलिस ऐसा ही सोचती है.' पीठ ने कहा कि यह पूरी तरह निराशाजनक है कि पुलिस क्यों नहीं जल्द से जल्द कैमरे लगा रही है.
अदालत ने कहा कि इस देरी के लिए केंद्र सरकार भी 'समान रूप से जिम्मेदार है.' सुनवाई के दौरान आप सरकार ने कहा कि अगर केंद्र सरकार अनुमति दे तो वह राजधानी भर में और पुलिस स्टेशनों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाना चाहती है.