
कहते हैं, 'जीत के सभी साथी होते हैं और हार में सब साथ छोड़ देते हैं.' अभी दो हफ्ते पहले बीजेपी ने जब त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में किले फतह किए तो उनके सहयोगी दल उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थें. लेकिन जैसे ही यूपी और बिहार की 3 लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को मुंह की क्या खानी पड़ी और दूसरी तरफ टीडीपी के एनडीए से जाने के बाद जो सहयोगी दल पहले पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की शान में कसीदे पढ़ते थे, वो ही अब उनके नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं.
चिराग पासवान बोले- 2019 में दिक्कत आएगी
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे और लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने कहा कि उपचुनाव के नतीजे 2019 के चुनाव के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं, यह खतरे की घंटी है. अभी भी समय है, गठबंधन के साथी दलों से सलाह-मशविरा के बाद ही फैसले लिए जाएं. उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी को अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इन उपचुनावों पर चिंतन करना चाहिए. जो नाराज़ सहयोगी हैं, उनकी नाराज़गी को दूर करना चाहिए, नहीं तो 2019 में दिक्कत आएगी.
अकाली दल के सांसद का बयान
उसके बाद अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि ये बात ध्यान में रखनी चाहिए की 2019 में किसी एक की दल की पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनेगी. गुजराल ने बताया कि वो टीडीपी की मांग आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए, उससे सहमत हैं. उन्होंने ये भी कहा, 'मैं पिछले तीन साल से कह रहा हूं कि ये एनडीए पिछले एनडीए जैसा काम नहीं कर रहा है. अटल जी की कुछ और ही बात थी.'
'सभी साथी दलों का सम्मान करे बीजेपी'
नरेश गुजराल ने आगे कहा, 'मेरा मानना है, समय आ गया है कि साथी दलों को अहमियत दी जाए. बीजेपी को सभी साथी दलों का, चाहे छोटा दल हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए और उनकी बातों को सुनना चाहिए क्योंकि सबकी अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूरियां और जरूरत हैं. अगर ऐसा नहीं होगा तो 2019 में एनडीए को इसका नुकसान होगा. वो यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि बीजेपी के कुछ नेता कभी राम मंदिर, कभी गौ हत्या जैसे अन्य कई मुद्दे लाकर सरकार को एजेंडे से भटका देते हैं.
BJP के साथ 2019 का चुनाव नहीं लड़ेगी शिवसेना
शिवसेना पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वो 2019 का चुनाव एनडीए के साथ नहीं लड़ेगी. ऐसे में कल तक एनडीए की सहयोगी पार्टी रही टीडीपी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई है. टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस, टीएमसी, एआईएडीएमके, लेफ्ट, समाजवादी पार्टी साथ खड़ी हैं. सूत्रों की मानें तो शिवसेना टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन भले नहीं करेगी लेकिन वोटिंग के दौरान सदन से वॉकआउट करेगी.
बीजेपी के लिए उपचुनाव हारना और टीडीपी का एनडीए से बाहर जाना, 2019 के आम चुनाव की दृष्टि से बिलकुल ठीक नहीं है. ये ऐसी स्थिति है कि अगर अभी कंट्रोल नहीं किया, तो 2019 की राह कमजोर हो जाएगी.