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बंगालः ममता की बादशाहत बरकरार, लेकिन दो नंबर पोजिशन लगातार मजबूत कर रही BJP

पश्चिम बंगाल में 2014 के बाद से राज्य में बीजेपी का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ा है. उपचुनाव के बाद पंचायत चुनाव में सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है, जो कि कभी सत्ता में रही सीपीएम के लिए नई चुनौती बन रही है.

पश्चिम बंगाल में अमित शाह (फाइल फोटो) पश्चिम बंगाल में अमित शाह (फाइल फोटो)
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2018,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बादशाहत बरकरार है. पंचायत चुनाव में जबरदस्त सीटें जीतकर फिर ये साबित कर दिया. पर अब बंगाल में नंबर दो की सियासी लड़ाई दिलचस्प हो गई है. 2014 के बाद से राज्य में बीजेपी का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ा है. उपचुनाव के बाद पंचायत चुनाव में सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है, जो कि कभी सत्ता में रही सीपीएम के लिए नई चुनौती बन रही है.

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पंचायत चुनाव में टीएमसी नंबर वन

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ टीएमसी ने क्लीन स्वीप किया है. राज्य में कुल 31,802 ग्राम पंचायत सीटों में से टीएमसी ने 20,848 पंचायत सीटों पर कब्जा जमाया है. जबकि बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी ने 5,636 सीटें जीती हैं और उसने 21 सीटों पर बढ़त बना रखी है. बीजेपी पहली बार राज्य की सभी जिलों में जीत दर्ज करने में कामयाब हुई है.

पंचायत चुनाव के संकेत

सीपीएम और कांग्रेस का पंचायत चुनाव में पूरी तरह से सफाया हो गया है. सीपीएम के 1415 उम्मीदवार पंचायत चुनाव में जीते हैं. वहीं कांग्रेस चौथे नंबर रही और महज 993 ग्राम पंचायत सीटें ही जीत सकी. जबकि इन दोनों पार्टियों से ज्यादा तो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. 1741 पंचायत सीटों पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की है.  

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उपचुनाव में भी बीजेपी दूसरे नंबर

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की नवपाड़ा विधानसभा और उलुबेरिया लोकसभा उपचुनाव में टीएमसी ने जीत हासिल की थी. लेकिन दिलचस्प बात इन दोनों सीटों पर बीजेपी को सीपीएम से ज्यादा वोट मिले थे. सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी लगातार जिस तरह से दूसरे स्थान पर काबिज होती जा रही है. इसके संकेत साफ है कि बीजेपी का ग्राफ लगातार राज्य में बढ़ रहा है. बीजेपी के लिए भले ही ये हार रही हो, लेकिन यह हार में छिपी जीत मानी जा रही है.

बीजेपी का सीपीएम से आगे निकलना राज्य के बदलते सियासी माहौल का संकेत दे रहा है. ये नतीजे राज्य में कई दशकों तक शासन करने वाले वाममोर्चा और कांग्रेस पार्टी के लिए खतरे की घंटी की तरह साबित हुए हैं.  वहीं बीजेपी 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पॉजिटिव संकेत के तौर पर देख रही है.  

बीजेपी का मिशन बंगाल

बंगाल की सियासत में बीजेपी अपनी जड़ें जमाने के लिए पुरजोर कोशिश में लगी है. 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार उसका ग्राफ राज्य में बढ़ा है. बीजेपी शुरू से ही ममता बनर्जी को मुस्लिमपरस्त के तौर पर पेश करती रही है. बीजेपी आने वाले चुनाव में ममता की मुस्लिमपरस्ती की छवि को भुनाने की कोशिश में है.

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कैसे बढ़ रही बीजेपी की ताकत

राज्य की ममता सरकार के खिलाफ बीजेपी लगातार अभियान चलाने में जुटी है. बीजेपी सड़क तक पर संघर्ष करती हुई नजर आ रही है. इतना ही नहीं बीजेपी ने राज्य में अपने को मजबूत करने के लिए टीएमसी के दिग्गत नेता मुकुल राय को भी अपने साथ मिला. राज्य में मुस्लिम मतों को देखते हुए उन्हें भी गले लगाने में जुटी है. राज्य में बीजेपी ने मुस्लिम सम्मेलन किया है. पिछले साल हुए निकाय चुनावों में भी बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी.

कमजोर कांग्रेस, बिखरी सीपीएम के लिए नई चुनौती

राज्य के पंचायत चुनाव और उपचुनाव में बीजेपी भले ही जीत न पाई हो लेकिन पार्टी मत प्रतिशत में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. जबकि कांग्रेस का ग्राफ लगातार राज्य में दिन ब दिन गिरता जा रहा है. पहले लोकसभा, फिर विधानसभा, नगर निकाय और उपचुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव में कमजोर रही. वहीं लंबे समय तक राज्य की सत्ता पर राज करने वाली सीपीएम का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है. दूसरे नंबर से अब वो तीसरे स्थान पर खिसक गई. ऐसे में सीपीएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी बन रही है.

बीजेपी के राज्य में ये आंकड़े

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के 17 फीसदी वोटों के साथ दो सांसद जीतने में सफल रहे थे. सीपीएम के भी दो ही सांसद जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. लेफ्ट को जहां 2009 की तुलना में 13 सीटों का नुकसान हुआ था तो वहीं बीजेपी को एक सीट का फायदा हुआ था. इसके अलावा 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की 6 फीसदी वोट की बढ़ोत्तरी हुई और पार्टी को 10 फीसदी मत मिले. बीजेपी के तीन विधायक जीतने में सफल रहे. जबकि उसके गठबंधन को 6 सीटें मिलीं. इससे पहले बीजेपी के एक भी विधायक नहीं थे.

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