
जिन्ना विवाद के बाद उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक बार चर्चा में है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने AMU और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में दलितों को आरक्षण देने की मांग की थी. अब इस मामले में एक और कदम आगे बढ़ा दिया गया है.
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया आज (मंगलवार) एएमयू का दौरा करेंगे. यहां वह आरक्षण नीति लागू किए जाने के मसले पर कमिश्नर, डीएम, एसएसपी, एएमयू के वीसी एवं रजिस्ट्रार के साथ सर्किट हाउस में बैठक करेंगे.
बताया जा रहा है कि इन सभी के अलावा वह सीधे एससी-एसटी और ओबीसी के छात्रों के साथ भी सीधा संवाद करेंगे. कठेरिया के यूनिवर्सिटी में आने से पहले ही अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने भी एएमयू वीसी को इस बारे में खत लिख दिया गया है.
दरअसल, बीते कई दिनों में दलितों के मुद्दे पर बीजेपी बैकफुट पर थी. इस बीच योगी ने आरक्षण का मुद्दा उठा आलोचकों को ही निशाने पर लिया था. सीएम योगी ने कहा था कि जो दल बीजेपी को दलित विरोधी बता रहे हैं, वो इन विश्वविद्यालयों में दलितों को आरक्षण नहीं दिलवा पाए.
कन्नौज में एक कार्यक्रम के दौरान योगी ने कहा कि दलितों को इन विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण मिलना चाहिए. लेकिन कभी किसी दल ने इसकी पैरवी नहीं की.
BHU में आरक्षण तो AMU में क्यों नहीं
योगी ने सीधा सवाल करते हुए पूछा था कि जब बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जब दलितों को आरक्षण दिया जाता है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और दिल्ली की जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिल सकता. सीएम योगी ने पूछा कि राजनीतिक दल इसे लेकर आंदोलन क्यों नहीं नहीं छेड़ते हैं.
हाल ही में दलितों पर लगातार हो रहे हमले, SC/ST कानून में बदलाव समेत दलितों से जुड़े कई ऐसे मुद्दे रहे हैं, जिनको लेकर मोदी सरकार और बीजेपी बैकफुट पर है. कई मामले तो उत्तर प्रदेश से ही जुड़े हुए थे.