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साइंस न्यूज़

पल भर में मिसाइल मार गिराएगा, दुश्मन हमेशा नजर में रहेगा...स्वदेशी MALE ड्रोन तपस ने भरी 18 घंटे उड़ान

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST
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तपस (TAPAS) का पूरा नाम है टैक्टिकल एयरबॉर्न प्लेटफॉर्म फॉर एरियल सर्विलांस बेयॉन्ड होराइजन (Tactical Airborne Platform for Aerial Surveillance-Beyond Horizon). तपस का मतलब गर्मी होता है. यह एक संस्कृत शब्द है. यह निगरानी के साथ-साथ हमला करने में भी सक्षम है. (फोटोः DRDO)

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तपस एक मेल (MALE) ड्रोन है. यानी मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन. इसे डीआरडीओ की ही एक ब्रांच एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट ने बनाया है. इसका उत्पादन साल 2016 से चल रहा है. कई बार इसकी टेस्ट फ्लाइट हो चुका है. जल्द ही इसे तीनों सेनाओं में शामिल किया जाएगा. (फोटोः DRDO)

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तीनों सेनाओं ने मिलकर 76 तपस ड्रोन्स की मांग की है. इसमें से 60 इंडियन आर्मी के पास जाएंगे. 12 इंडियन एयरफोर्स और 4 ड्रोन इंडियन नेवी के पास भेजे जाएंगे. यह अमेरिका के जनरल एटॉमिक्स के MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन जैसा ही है. अमेरिकियों ने प्रीडेटर ड्रोन को सर्विलांस से लड़ाकू बना दिया. यह ड्रोन हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल के जरिए हमला कर सकता है. (फोटोः DRDO)

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तपस ड्रोन खुद ही टेकऑफ और लैंड कर सकता है. यह रीयल-टाइम, हाई-रेजोल्यूशन इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रीकॉन्सेंस, SAR, EO जैसे काम कर सकता है. अगर टारगेट तय कर दिया जाए तो यह लेजर बीम डालकर उसे रोशन कर सकता है, जिसके बाद लेजर गाइडेड मिसाइल या फाइटर जेट से हमला किया जा सकता है. (फोटोः ट्विटर/रिव्यूवायु)

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अगर कम ऊंचाई पर उड़ा रहा हो तो यह अपने हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल से भी हमला कर सकता है. यह 350 किलोग्राम वजनी पेलोड लेकर उड़ सकता है. 31.2 फीट लंबे इस ड्रोन का विंगस्पैन 67.7 फीट है.  इसमें तीन ब्लेड वाले प्रोपेलर लगे हैं, जो इसे उड़ने की ताकत देते हैं. 

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तपस ड्रोन अधिकतम 224 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से लगातार 1000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. यह लगातार 24 घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता रखता है. अधिकतम 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. माना जा रहा है कि अगले साल के अंत तक ये ड्रोन्स तीनों भारतीय सेनाओं को मिल जाएंगे. 

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तीनों सेनाओं को यह ड्रोन मिलने के बाद अमेरिकी और इजरायली ड्रोन्स खरीदने नहीं पड़ेंगे. अपने ड्रोन्स के जरिए ही जासूसी, निगरानी और जरुरत पड़ने पर हमला किया जा सकेगा. (फोटोः ट्विटर/रिव्यूवायु)

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