
सदियां गुजरने के बाद भी कुशल राजनीतिज्ञ माने जाने वाले आचार्य चाणक्य की नीतियां प्रासंगिक हैं. चाणक्य द्वारा रचित नीति ग्रन्थ 'चाणक्य नीतिशास्त्र' में उन्होंने जीवन के मूल्यों को लेकर काफी बातें कही हैं. वो ऐसी चार चीजों के बारे में बताते हैं जिसे मनुष्य ने अपने जीवन में नहीं किया तो उसका जीवन अर्थहीन है. आइए जानते हैं उन चार चीजों को बारे में....
धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्यैकोऽपि न विद्यते ।
जन्मजन्मनि मत्येष मरणं तस्य केवलम् ।।
धर्म
चाणक्य के मुताबिक अपने अच्छे कर्मों से धर्म का संचय करता है, उसका जन्म लेना सफल हो जाता है. उनके अनुसार धर्म की प्राप्ति और उसके मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति को धन अर्जित करना चाहिए, फिर उसका उपभोग करना चाहिए.
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काम
मनुष्य के जीवन में कर्म को सर्वोपरि माना गया है. चाणक्य भी कहते हैं कि मनुष्य को कर्म करते करते हुए मोक्ष की प्राप्ति करनी चाहिए. वो कहते हैं कि व्यक्ति को अपनी काम इच्छा की पूर्ति अवश्य करनी चाहिए. विवाह करना चाहिए, संतान भी उत्पन्न करना चाहिए. इसके बिना मनुष्य को सफल नहीं माना जा सकता है.
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धन
धन को अर्जित करना और उसका सही तरीके से उपभोग एक सफल मनुष्य के लिए अत्यंत आवश्यक चीज है. चाणक्य के मुताबिक धन को संचय करने वाला मनुष्य सार्थकता को नहीं पा सकता. जिसने धन नहीं कमाया उसका धरती पर जन्म लेना व्यर्थ है.
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मोक्ष
चाणक्य धर्म, काम और धन के साथ मोक्ष की बात भी करते हैं. वो कहते हैं कि पहले की तीनों बातों का पालन करते हुए मनुष्य को मोक्ष प्राप्त करना चाहिए. जो व्यक्ति इनमें से किसी एक से भी वंचित रह जाता है तो समझिए कि उसके जीवन का कोई अर्थ नहीं है. चारों में से कुछ भी न करने वाले व्यक्ति जीवन में सार्थकता को प्राप्त नहीं कर पाते हैं. जीवन को सफल बनाने के लिए इन चार चीजों से प्रेम करना चाहिए.
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