
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (Indian Space Research Organization - ISRO) के चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर भले ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सही से लैंड न कर पाया हो लेकिन इसरो ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपने निशान 10 साल पहले ही छोड़ दिए थे. इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की खोज की थी. आज ही के दिन यानी 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 को लॉन्च किया गया था. इसके करीब एक महीने बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इसरो ने अपनी वैज्ञानिक सफलता के निशान छोड़ दिए. ये निशान छोड़े मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) ने, जिसपर तिरंगा बना हुआ था.
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आइए जानते हैं कि आखिर कैसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा था ISRO?
22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 की लॉन्चिंग की गई. करीब 22 दिन बाद 14 नवंबर 2008 को चांद से 102 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहे Chandrayaan-1 से मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) से अलग हुआ. वह तेजी से चांद की सतह की तरफ जा रहा था. MIP को 25 मिनट लगे चांद की सतह पर गिरने में. वह 6100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार यानी 1.69 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह से टकराया था. इस टकराव से मून इंपैक्ट प्रोब पूरी तरह से ध्वस्त हो गया. लेकिन उससे पहले मून इंपैक्ट प्रोब ने वह काम कर दिया, जिसने इतिहास बना दिया.
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चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित शैक्लेटॉन क्रेटर में गिरा था मून इंपैक्ट प्रोब
मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित शैक्लेटॉन क्रेटर में गिरकर ध्वस्त होने से पहले ही इतिहास रच दिया था. उसने वहां पानी की मौजूदगी के सबूत इसरो के पृथ्वी पर स्थित सेंटर में भेज दिए थे. उसने चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर को यह संदेश भेज दिया था कि जहां मैं गिर रहा हूं, वहां बर्फ के रूप में पानी मौजूद है. यही संदेश पृथ्वी पर स्थित इसरो के डीप स्पेस नेटवर्क को भी मिली थी.
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10 महीने बाद इसरो ने बताया कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी है
चंद्रयान-1 के मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) से मिले डेटा का विश्लेषण करके 10 महीने बाद 25 सितंबर 2009 को इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित शैक्लेटॉन क्रेटर में पानी बर्फ के रूप में मौजूद है. उस समय एक घटना यह हुई कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 24 सितंबर 2009 को कहा कि चंद्रयान-1 में लगे उनके उपकरण मून मिनरेलॉजी मैपर (M3) ने चांद पर पानी खोज लिया है. लेकिन नासा ने इसकी पुष्टि नहीं की. तब दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने विश्लेषण कर बताया कि चंद्रयान-1 के भारतीय MIP ने पहले ही पानी खोज लिया था. नासा के M3 ने मून इंपैक्ट प्रोब की खोज की पुष्टि की है.
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का आइडिया मून इंपैक्ट प्रोब (MIP)
मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) देश के पूर्व राष्ट्रपति और दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सोच का नतीजा था. उनके कहने पर ही इसरो के वैज्ञानिकों ने मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) बनाया था. उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार को कहा था कि मैं चाहता हूं कि भारतीय वैज्ञानिक चांद के एक हिस्से पर अपना निशान छोड़े. इस काम में भारतीय वैज्ञानिकों को पीछे नहीं होना चाहिए.
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मून इंपैक्ट प्रोब में थे तीन उपकरण, जिन्होंने बताया कि चांद पर पानी है
मून इंपैक्ट प्रोब (Moon Impact Probe - MIP) में मौजूद तीन उपकरणों की मदद से इसरो ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की खोज की थी. ये उपकरण थे - राडार अल्टीमीटर, वीडियो इमेजिंग सिस्टम और मास स्पेक्ट्रोमीटर बेस्ट पेलोड चेस. चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर से अलग होते ही तीनों ने काम करना शुरू कर दिया था. 25 मिनट की उड़ान के दौरान मून इंपैक्ट प्रोब के इन तीनों उपकरणों ने ऑर्बिटर को डेटा भेजना शुरू कर दिया था. चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित शैक्लेटॉन क्रेटर में क्रैश करने से पहले इन तीनों ने इतने डेटा भेज दिए थे, जिनके आधार पर इसरो वैज्ञानिकों ने चांद पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी.