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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: गुलजार बोले- मुझे सियासत नहीं आती

मंच पर पहुंचते ही गुलजार बोले कि उन्हें भाषण देने में बड़ी मुश्किल होती है, पहले वह सिर्फ एक नज्म सुना कर चले जाते थे लेकिन अब उन्हें मुख्य वक्ता बना दिया जाता है.

गुलजार ने किया कार्यक्रम का आगाज गुलजार ने किया कार्यक्रम का आगाज
संदीप कुमार सिंह
  • जयपुर,
  • 19 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

गुरूवार को जयपुर में 10वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आगाज़ हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया. कार्यक्रम में पहले वक्ता के तौर पर मशहूर लेखक गुलजार ने कहा कि मुझे राजनीति करनी नहीं आती है, मैं भी आम आदमी की तरह सियासत से प्रभावित हो जाता हूं. गुलजार ने कहा कि मुझे उन कुर्सियों पर बैठने से डर लगता है जहां पर बैठने से पांव जमीन पर नहीं लगते हैं.

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मंच पर पहुंचते ही गुलजार बोले कि उन्हें भाषण देने में बड़ी मुश्किल होती है, पहले वह सिर्फ एक नज्म सुना कर चले जाते थे लेकिन अब उन्हें मुख्य वक्ता बना दिया जाता है. गुलजार ने कार्यक्रम में सुनाया कि उबलती हांडिया इतनी, सभी में जिंदगी उबलती है, लेकिन न पकती है न गलती है, ये जिंदगी यूं ही चलती है.

कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश के कई मशहूर लेखकों, साहित्यकारों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम की शुरुआत तबलावादक उस्ताद जाकिर हुसैन की जुगलबंदी से हुई.

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