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वायु प्रदूषण से 9 साल कम हो रही दिल्लीवासियों की जिंदगी

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की जिंदगी 9 साल तक कम होती जा रही है. अगर इन शहरों में प्रदूषण कम हो जाए, तो यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी 9 साल तक बढ़ जाएगी.

दिल्ली में वायु प्रदूषण (Courtesy- PTI) दिल्ली में वायु प्रदूषण (Courtesy- PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 10:33 PM IST

  • दिवाली के बाद से गैस चैम्बर बन गई है दिल्ली
  • वायु प्रदूषण कम होने से देशवासियों की बढ़ेगी उम्र
  • आगरा में 8.1 साल और बरेली में 7.8 साल ज्यादा होगी उम्र

दिवाली की आतिशबाजी के चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश की आबोहवा खराब हो गई है. दिल्ली-एनसीआर गैस चैम्बर बन गया है और लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है. इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के चलते लोगों की जिंदगी पर संकट बढ़ता जा रहा है.

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शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) के मुताबिक अगर भारत में वायु प्रदूषण कम रहता है और वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों अनुसार रहती है, तो लोग औसतन चार साल ज्यादा जीवित रह सकते हैं.

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की जिंदगी 9 साल तक कम होती जा रही है. अगर इन शहरों में प्रदूषण कम हो जाए, तो यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी 9 साल तक बढ़ जाएगी. वहीं, अगर आगरा में वायु प्रदूषण कम हो जाए, तो वहां के लोगों की जिंदगी 8.1 वर्ष और बरेली के लोगों की जिंदगी 7.8 वर्ष तक बढ़ सकती है.

जानलेवा साबित हो रहा वायु प्रदूषण

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एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स के मुताबिक अगर हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) राष्ट्रीय या डब्लूएचओ मानकों को पूरा करता है, तो देश की जनता की उम्र में काफी इजाफा हो सकता है.

आपको बता दें कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) आकार में 2.5 माइक्रोन से कम होता है. यह मानव बाल के मुकाबले 30 गुना अधिक महीन होता है और सांस लेने से ये फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है.

जीवनकाल पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने वाला एक्यूएलआई भारत की राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक से एक कदम आगे है, जो हवा में 8 प्रदूषक की उपस्थिति को मापता है और स्तर की गंभीरता को 6 कटेगरी में दर्ज करता है. भारत में वायु गुणवत्ता का निर्धारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करता है.

वायु प्रदूषण कम होने से दिल्ली को सबसे ज्यादा फायदा

दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ने 98 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का वार्षिक औसत दर्ज किया है, जो कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक के तहत सुरक्षित माने जाने वाली सीमा से दोगुना है और डब्ल्यूएचओ मानक से करीब 10 गुना ज्यादा है. वायु प्रदूषण कम करने से सबसे ज्यादा दिल्ली को लाभ मिलेगा.

अगर दिल्ली की वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों तक पहुंचती है, तो दिल्लीवासियों का जीवन करीब 5.9 साल ज्यादा होगा, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानक तक पहुंचने से नौ साल का इजाफा हो सकेगा.

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कैसे तैयार किया गया एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स?

एक्यूएलआई ‘प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित शोधों के डेटा पर आधारित है. इसके मुताबिक आकार (पीएम 10) में 10 माइक्रोन की हवाई सामग्री में 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि से 0.64 साल जिंदगी कम हो जाती है.

वायु में पीएम 2.5 के निर्धारित स्तरों के लिए डब्ल्यूएचओ मानक 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, लेकिन पीएम 2.5 के लिए भारत की राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. यह डब्ल्यूएचओ के मानक से तीन गुना अधिक है.

शिकागो यूनिवर्सिटी में एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल ग्रीनस्टोन ने बताया कि डब्ल्यूएचओ इस तरह के एक कम मानक को ठीक से आवंटित करता है, क्योंकि छोटे कण के प्रदूषण से बहुत कम स्तर पर भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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