
भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले लगभग 26 करोड़ बैंक खातों से पैसा निकालने की सीमा तय कर दी है. इन खातों से अब अगली सूचना तक एक महीने में सिर्फ 10,000 रुपये की निकासी की जा सकती है. रिजर्व बैंक के मुताबिक जिन जनधन खातों की केवाईसी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है उनसे एक महीने में 10,000 रुपये निकाले जा सकते हैं. वहीं जिन खातों की केवाईसी प्रक्रिया अभी लंबित है उनसे एक महीने में महज 5,000 रुपये ही निकाले जा सकते हैं.
26 करोड़ जनधन खाते
देश में सभी को बैंकिंग से जोड़ने के लिए अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत हुई थी. बीते ढाई साल के दौरान इस योजना के तहत 25.68 करोड़ लोगों का बैंक खाता खोला जा चुका है. इन खातों से देश की गरीब जनता को बैंकिंग व्यवस्था का फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया है. इस योजना के तहत खुले सभी खाते जीरो बैलेंस कैटेगरी के हैं, यानी इन खातों में पैसा नहीं होने पर ये न तो सस्पेंड किए जाएंगे और न ही इनपर कोई जुर्माना लगाया जाएगा.
जनधन खाते क्यों हुए 10 हजारी
1. देश में 500 रुपये और 1000 रुपये की नोट को प्रतिबंधित करने के बाद रिजर्व बैंक को पता चला कि 8 नवंबर के बाद से लगातार इन खातों में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नोटो को जमा किया जा रहा है.
2. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी लागू होने के पहले 14 दिनों में 27,200 करोड़ रुपये जनधन खातों में जमा हुए हैं. वहीं इन खातों में 23 नवंबर तक कुल जमा रकम 72,835 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है.
3. रिजर्व बैंक को यकीन है कि ग्रामीण इलाकों में किसानों के जनधन खातों का इस्तेमाल कालेधन को सफेद करने की कोशिश के चलते किया जा रहा है.
4. जनधन खातों में जमा करने की अधिकतम सीमा 50,000 रुपये हैं. इसका फायदा उठाते हुए नोटबंदी के बाद इन खातों में 49,000 रुपये जमा कराए जा रहे थे.
5. नोटबंदी के बाद इतनी बड़ी रकम जमा होने के बाद रिजर्व बैंक को अंदेशा था कि अब इन खातों से निकासी की गतिविधियां तेज हो सकती है. इस निकासी से कालाधन जमा कराने वालों को 500 और 1000 रुपये की प्रतिबंधित करेंसी के बदले नई करेंसी मिल जाएगी.
6. जनधन खातों का इस तरह गैरकानूनी इस्तेमाल करने के लिए ग्रामीण इलाकों में किसानों को जरिया बनाए जाने की बात साबित हो चुकी है. कालाधन रखने वाले साहूकार और कारोबारियों ने कुछ पैसों का लालच देकर किसानों के खाते में यह रकम जमा कराई है.
7. इस फैसले से रिजर्व बैंक की कोशिश है कि जिन खातों की केवाईसी (खाताधारकों की जांच) नहीं हुई है उन्हें पैसे निकालने में दिक्कत हो और इस दौरान वह ऐसे खाताधारकों की कमाई का ब्यौरा एकत्रित कर लें.
8. कारोबारी और आम आदमी के कालेधन के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों की नजर भी इन खातों में डाले गए पैसे पर है. इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि जनधन खातों का फायदा उठाते हुए देश में सक्रिय आतंकी संगठन और असमाजिक तत्वों ने भी अपनी 500 रुपये और 1000 रुपये की करेंसी इन खातों में जमा करा दी हो.