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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी किए गए प्रवेश परीक्षा के नतीजों में सामने आया है कि हिंदी में एमफिल और पीएचडी करने के लिए 749 उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया था और उसमें से सिर्फ चार लोगों का चयन किया गया है. बताया जा रहा है कि ये हाल किसी एक कोर्स का नहीं है, बल्कि कई कोर्स में ऐसा सामने आया है कि बहुत कम लोग पास हुए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ विद्यार्थियों और शिक्षकों का कहना है कि किसी को भी एक्स्ट्रा नंबर नहीं दिए जा रहे हैं. सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज के चेयरमैन गोविंद प्रसाद का कहना है कि आरक्षण की नीति खत्म कर दी गई है. उन्होंने बताया कि हिंदी विभाग में 12 सीटें खाली है, लेकिन परीक्षा देने वाले 749 उम्मीदवारों को वाइवा (मौखिक परीक्षा) के लिए चयनित किया गया है.
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उन्होंने बताया कि ऐसा जरूरी नहीं है कि जिन 4 लोगों ने लिखित परीक्षा पास की है, वो इंटरव्यू में पास हो पाएंगे, जिसका फाइनल चयन पर काफी असर पड़ता है. वहीं रिजनल विभाग में 10 उम्मीदवारों का चयन हुआ है, जबकि वहां करीब 18 सीटें खाली है. बताया जा रहा है कि यह इस वजह से हो रहा है कि अब परीक्षा पास करने के लिए 50 फीसदी अंक लाना आवश्यक हो गया है. साथ ही किसी भी उम्मीदवार को आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है.
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हालांकि कम लोगों के चयन होने को लेकर जेएनयू विद्यार्थियों की यूनियन का कहना है कि इस बार प्रशासन ने चयनित होने वाले छात्रों की लिस्ट भी कॉलेज परिसर नहीं चिपकाई है. अध्यक्ष गीता कुमारी का कहना है कि इससे पहले ये किया जाता था और कम अंक नंबर हासिल करने वाले उम्मीदवारों को भी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था.