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CM केजरीवाल व उपराज्यपाल के बीच टकराव पर सियासी पार्टियां बंटी, मजूमदार ने फिर संभाला पद

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच 'दायरे' को लेकर टकराव थमता नजर नहीं आ रहा है. वैसे इस मसले पर केंद्र के नोटिफिकेशन के बाद अनिंदो मजूमदार ने फिर से प्रधान सचिव (सेवा) का कामकाज संभाल लिया है.

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2015,
  • अपडेटेड 8:26 AM IST

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच 'दायरे' को लेकर टकराव थमता नजर नहीं आ रहा है. वैसे इस मसले पर केंद्र के नोटिफिकेशन के बाद अनिंदो मजूमदार ने दिल्ली में फिर से प्रधान सचिव (सेवा) का कामकाज संभाल लिया है. सूत्रों के मुताबिक इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 39 आईएएस अफसरों की लिस्ट तैयार करके केन्द्र सरकार से उन्हें वापस लेने की मांग की है.

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इस मसले पर अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके केंद्र की मोदी सरकार, बीजेपी और उपराज्यपाल पर संगीन आरोप लगाए हैं. दूसरी ओर सियासी पार्टियां इस पर अलग-अलग राय दे रही हैं.  

CM ने LG को ठहराया मोदी का वायसराय
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एलजी सिर्फ एक चेहरा हैं. वे प्रधानमंत्री मोदी के वाइसरॉय हैं और केंद्र के आदेशों का ही पालन करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली में अपने पसंदीदा अधिकारियों को ही रखना चाहती है.

केंद्र के नोटिफिकेशन पर प्रहार
केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस अधिसूचना पर हमला बोला, जिसमें लोक-व्यवस्था और सेवा से जुड़े मामलों में उपराज्यपाल की शक्ति का जिक्र किया गया है. केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार आम आदमी पार्टी के अच्छे कार्यों से परेशान हो गई है. केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अधिसूचना इसलिए जारी की है, क्योंकि वे AAP की सरकार द्वारा किए गए अच्छे काम से परेशान हो गए हैं.'

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केजरीवाल ने कहा, 'अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले के लिए पैसे लिए जाते हैं और अधिसूचना इसीलिए जारी की गई, क्योंकि उनकी सरकार ने इसे बंद कर दिया है.' उन्होंने कहा, 'वे (BJP) दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और तैनाती का अधिकार चाहते हैं, ताकि वे अपने लोगों को दिल्ली में तैनात कर सकें.'

उपराज्यपाल तो सिर्फ एक चेहरा: केजरीवाल
केजरीवाल ने उपराज्यपाल पर विकास संबंधी मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए कहा, 'उनका पूरा ध्यान अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति पर है.' उन्होंने कहा, 'हमारी उपराज्यपाल से कोई सीधी लड़ाई नहीं है. वह तो एक चेहरा हैं जिसे प्रधानमंत्री दफ्तर से निर्देश दिए जा रहे हैं.'

हालांकि केजरीवाल ने अधिसूचना का जवाब देने के बारे में अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा, 'हम इसे समझ रहे हैं. इस बारे में हमने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह मांगी है.'

अधिसूचना गुरुवार को जारी की गई थी, जिसमें कहा गया है, 'संविधान के अनुच्छेद 293एए (69वां संशोधन अधिनियम 1991) में कहा गया है कि संघ शासित प्रदेश दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कहा जाएगा और इसका व्यवस्थापक उपराज्यपाल के रूप में नामित किया जाएगा.'

शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति से बढ़ा विवाद
केजरीवाल और जंग के बीच विवाद वरिष्ठ नौकरशाह शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ था. उपराज्यपाल ने 15 मई को गैमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया था. केजरीवाल का आरोप है कि गैमलिन राष्ट्रीय राजधानी में बिजली वितरण कंपनियों के लिए लॉबिंग करती थीं.

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‘संकट’ के लिए नजीब जंग, केजरीवाल जिम्मेदार: कांग्रेस
दिल्ली ‘संकट’ के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस ने कहा कि दोनों ने अपनी सीमाओं को लांघा है और शासन के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया है.

कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने जम्मू में संवाददाताओं से कहा, ‘शासन बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, लोग नहीं जानते हैं कि कौन फैसले करता है, क्योंकि यह एक चेहराविहीन चीज है. लेकिन दुर्भाग्य से जंग और केजरीवाल, जो खुद नौकरशाही की पृष्ठभूमि से आते हैं, ने शासन के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया और मामला सड़क पर ला रहे हैं.’

पुनिया ने कहा, ‘संकट के लिए वे दोनों जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने अपनी सीमाओं को लांघा है. बीजेपी जो केंद्र में सत्ता में है, उसकी भूमिका भी अच्छी नहीं है. बीजेपी ने मुद्दे पर संतुलित रुख नहीं अपनाया.’

वामपंथी पार्टियों ने नोटिफिकेशन की आलोचना की
वामपंथी पार्टियों ने उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र का विवरण देने वाली केन्द्र की अधिसूचना पर AAP सरकार की हिमायत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार को ‘जबरिया केन्द्रीकरण’ की जगह ‘सहयोगकारी संघवाद’ के माध्यम से मुद्दा हल करना चाहिए.

सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने कहा, ‘माकपा दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की हिमायत करती है. मौजूदा ढांचे में केन्द्र और उसके प्रतिनिधियों को जबरिया केन्द्रीकरण के मौजूदा रुख के बजाय सहयोगात्मक संघवाद के मार्फत मुद्दों को हल करना चाहिए.’

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सीपीएम के उप महासचिव गुरुदास दासगुप्त ने केन्द्र के कदम को ‘गलत’ करार दिया. दासगुप्त ने कहा, ‘यह सही नहीं है. यह गलत है. यह संविधान के खिलाफ है. हम राज्य सरकार की हिमायत करते हैं.’

गौरतलब है कि अधिसूचना में केन्द्र ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग का समर्थन किया है और यह साफ किया है कि नौकरशाहों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री केजरीवाल से सलाह लेना जंग के लिए अनिवार्य नहीं है.

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