
सेंसर बोर्ड के द्वारा लिपस्टिक अंडर माय बुर्का को असंस्कारी ठहराए जाने के बाद आज उसका ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. ट्रेलर सेक्स सीन से भरा हुआ है जिसे देखकर समझ आ जाता है कि क्यों सेंसर की ओर से इसे असंस्करी करार दिया गया.
लेकिन गहराई से देखने पर यह ट्रेलर पुरुषवादी सोच पर कड़ी चोट करता है. इतनी कड़ी चोट कि 'पारंपरिक' सोच वाला व्यक्ति इसे देखकर तिलमिला सकता है. वहीं सेंसर बोर्ड की ओर से फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है.
'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' को सेंसर बोर्ड ने बताया 'असंस्कारी', नहीं दिया सर्टिफिकेट
कई सवाल एक साथ छोड़ता है ट्रेलर
और फिर वही सवाल भी उठता है - अगर लड़की जींस पहन ले या लिपस्टिक लगा ले तो क्या उसका अफेयर हो जाएगा? इसके साथ ही फिल्म महिलाओं की ख्वाहिशों का जोरदार तरीके से पक्ष भी रखती है. इसमें मनचाहा पहनने की आजादी से लेकर उनकी शारीरिक जरूरतें भी शामिल है.
ट्रेलर बेशक बोल्ड है लेकिन इसका हर डायलॉग और सीन महिलाओं की स्थिति को दिखाते हुए उनके हक की बात करता है. फिल्म में कोई हीरोइन नहीं बल्कि किरदार हैं जो समाज की पक्षपाती और रुढ़िवादी सोच को अपने हालात से आगे लाती हैं.
चार महिलाओं पर आधारित है कहानी
इस फिल्म की कहानी में भारत के एक छोटे शहर की पृष्ठभूमि में दिखाई गई है. कहानी का तानाबाना चार महिलाओं की जद्दोजहद पर बुना गया है. ये महिलाएं आजादी की तलाश में हैं. जो खुद को समाज के बंधनों से मुक्त करना चाहती हैं. बता दें कि यह फिल्म मुंबई फिल्म फेस्टिवल में लैंगिक समानता पर बेस्ट फिल्म के लिए ऑक्सफेम अवॉर्ड जीत चुकी है. भारत में फिल्म 21 जुलाई को रिलीज हो रही है.
देखें ट्रेलर:
पहलाज निहलानी ने कहा बैन नहीं है
CBFC के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने इस मुद्दे पर कहा है कि उन्होंने अपना काम किया है और अब फिल्म के निर्माता ऊपरी संस्था या कोर्ट कहीं भी जा सकते हैं. निहलानी के मुताबिक, उन्होंने एक चिट्ठी जारी की है, जिसमें कारण बताने के लिए कहा गया है. ये बैननहीं है और ना ही विवाद है.
ट्रिपल तलाक के मौजूदा विवाद पर तमाचा है Lipstick Under My Burkha का ट्रेलर
बॉलीवुड ने जताई थी नाराजगी
बॉलिवुड में कई हस्तियों ने 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' को सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने की निंदा की थी. इनमें फिल्मकार फरहान अख्तर और पूजा भट्ट शामिल थे. निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि इंडस्ट्री मिलकर लड़ाई लड़े. विवेक अग्निहोत्री के मुताबिक वो पूरी तरह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं. प्रकाश झा को इस पर चुप नहीं बैठना चाहिए और लड़ना चाहिए.
फिल्म निर्देशक अशोक पंडित ने CBFC के फैसले की निंदा करते हुए कहा है कि ये पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए दुखी होने वाली बात है. पंडित ने प्रकाश झा को देश का नामचीन फिल्मकार बताते हुए कहा कि उन्हें इस तरह के फैसले का नुकसान झेलना पड़ रहा है. पंडित ने कहा कि सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी के बर्ताव पर वो आपत्ति जताते हैं. ये शर्मनाक है और इस तरह चीजों को हैंडल नहीं किया जाना चाहिए.
वकील और कार्यकर्ता आभा सिंह ने कहा कि वो नहीं समझतीं कि 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' जैसी फिल्म पर सेंसर बोर्ड या अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को कोई परेशानी होनी चाहिए. आभा सिंह ने कहा कि ये अच्छी बात है कि फिल्मकार ऐसे संवदेनशील विषयों पर फिल्में बना रहे हैं.