
मध्य प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सत्ता पर बीते 15 साल से काबिज़ बीजेपी के लिए एक बुरी खबर आई है. राज्य में 14 नगरपालिकाओं में पार्षद पद के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई है और कांग्रेस के सबसे ज़्यादा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.
आपको बता दें कि मंगलवार को 14 नगरपालिकाओं के वार्ड के लिए घोषित उपचुनाव के नतीजों में 14 नगरपालिकाओं में से 9 में कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं, जबकि बीजेपी के सिर्फ 4 उम्मीदवार ही जीत पाए हैं. वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को निर्विरोध जीत हासिल हुई है.
देखें किसको कहां से मिली जीत...
(1) बुरहानपुर के नेपानगर से कांग्रेस के राजेश जीते
(2) नीमच के सरवानिया महाराज से कांग्रेस की ललिताबाई जीती
(3) छिंदवाड़ा के न्यूटन चिखली से कांग्रेस के अजय कुमार जीते
(4) ग्वालियर के डबरा से कांग्रेस की रानी रावत जीती
(5) दमोह से बीजेपी की पूजा राज जीती
(6) मंदसौर के शामगढ़ से बीजेपी के दिलीप प्रजापति जीते
(7) दतिया से बीजेपी की गाय़त्री देवी जीती
(8) छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव से कांग्रेस के राजेंद्र कनौजिया जीते
(9) सिंगरौली से कांग्रेस की रंजना जीती
(10) भिंड के गोरमी से निर्दलीय प्रत्याशी ममता बाई जीती (निर्विरोध)
(11) भोपाल के बैरसिया से कांग्रेस की भाग्यश्री खत्री जीती
(12) अनूपपुर के बिजुरी से बीजेपी के संजय कुमार जीते
(13) सतना से कांग्रेस के धीरेंद्र सिंह जीते
(14) गुना के राघोगढ़ विजयपुर से कांग्रेस प्रत्याशि ओमश्री मीणा की जीत
उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस गदगद
नतीजों के बाद कांग्रेस गदगद है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने उपचुनाव के नतीजों के बाद ट्वीट कर सीएम शिवराज सिंह चौहान और उनकी जनआशीर्वाद यात्रा पर कटाक्ष किया है. कमलनाथ ने ट्वीट किया और लिखा कि प्रदेश के आए नतीजों में नगर पालिका व पंचायत चुनाव में कांग्रेस को मिली अभूतपूर्व सफलता की सभी कांग्रेसजनों को बधाई व जनता का आभार. जनआशीर्वाद यात्रा की जमीनी सच्चाई एवं डमरू की हकीकत इस परिणाम से प्रदेशवासियों के सामने आ गई है.
नहीं पड़ेगा विधानसभा चुनाव पर असर-बीजेपी
उपचुनाव के नतीजों पर बीजेपी का कहना है कि ये बेहद छोटे स्तर के चुनाव होते हैं, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा. मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय के मुताबिक स्थानीय निकाय के जो चुनाव हुए हैं वो पार्षदों के होते हैं और उसमें आपसी संबंध और स्थानीय मुद्दे होते हैं. इसका राजनीतिक रूप से कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन फिर भी बीजेपी जिन जगहों पर हारी है वहां की समीक्षा की जाएगी. कमलनाथ के ट्वीट पर बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस खुद को भुलावे में रखना चाहे तो रख सकती है.