
स्टॉफ सिलेक्शन कमिशन (एसएससी) पेपर लीक मामले में छात्रों का धरना लगातार 7वें दिन भी जारी है. इस मामले में सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. केंद्र सरकार ने छात्रों की मांग को मान लिया है. 17 फरवरी से लेकर 22 फरवरी तक जितने भी SSC से संबंधित परीक्षाएं हुई हैं उनकी जांच सीबीआई करेगी और साथ ही 9 मार्च को होने वाली परीक्षा भी सीबीआई की निगरानी में होगी, लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मानें तो उन्हें नेताओं के मौखिक बयानों पर विश्वास नहीं है.
दरअसल एसएससी द्वारा आयोजित सीजीएल 2017 के टियर- टू की परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हो गए थे, जिसके बाद से परीक्षार्थी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब इन छात्रों का मानना है कि एसएससी परीक्षा में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आए हैं इसलिए छात्र अपनी चार मांगों के साथ प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं.
ये हैं छात्रों की मांगें-
सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में एसएससी एग्जाम स्कैम की जांच की जाए.
9 मार्च को होने वाली परीक्षा स्थगित की जाए.
लैब्स की जांच ग्राउंड लेवल पर हो.
सिलेक्शन प्रॉसेस का समय तय किया जाए.
छात्रों के मुताबिक जब तक उन्हें मंत्रालय से लिखित में आश्वासन नहीं मिलता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. इतना ही नहीं छात्रों का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं हो जाती तब तक वो अपना संघर्ष जारी रखेंगे. छात्रों ने ये भी चेतावनी दे दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र मंगलवार को एक दिन के अनशन पर बैठने की तैयारी में हैं.
शौचालय तो दिया नहीं CBI जांच के मौखिक आश्वासन को कैसे मानें
हरियाणा से आई स्वाति का कहना है कि नेताओं पर से विश्वास उठ गया है. यहां पहले कई दिनों से नेता आ रहे हैं. कोई ना कोई वादा करके चले जाते हैं पर हमें मिलता कुछ नहीं, पहले दिन भी आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ बड़े नाम यहां आए थे. उन्होंने हमें पानी और टॉयलेट खुलवाने का आश्वासन दिया था लेकिन वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है.
आपको बता दें कि रविवार को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी, सांसद मीनाक्षी लेखी और छात्रों का एक प्रतिनिधि दल ने एसएससी चेयरमैन से मुलाकात की थी. जिसके बाद एसएससी चेयरमैन ने सीबीआई जांच की सिफारिश करने का फैसला किया था, लेकिन इसके बाद भी छात्र धरने पर डटे रहे.