
सुप्रीम कोर्ट गर्भपात से जुड़े कानून की समीक्षा के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट से 24 हफ्ते के गर्भ वाली महिला ने गर्भपात की मांग की है.
दरअसल, कानून के तहत 20 हफ्ते तक गर्भपात की इजाजत है. महिला का कहना है कि डॉक्टरों के मुताबिक उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण सामान्य नहीं है. उसके मानसिक विकारों के साथ जन्म लेने की आशंका है. महिला की याचिका पर कोर्ट सुनवाई के लिए राजी हो गया है. कोर्ट ने इसके लिए गुरुवार का दिन तय किया है. इस तरह की एक जनहित याचिका पहले से लंबित है.
याचिका में की गई ये एक्ट खत्म करने की मांग
याचिका में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट की धारा 3(बी) को चुनौती दी गई है. साथ ही मांग की गई है की इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए. इस धारा के मुताबिक 20 हफ्ते के बाद गर्भपात नहीं करा सकते. याचिका के मुताबिक, 1971 में जब ये कानून बना था तब भले ही इस धारा का औचित्य हो सकता हो लेकिन आज इसका औचित्य नहीं क्योंकि ऐसी आधुनिक तकनीक मौजूद हैं जिससे 26 हफ्ते के बाद भी गर्भपात कराया जा सकता है.
याचिका के मुताबिक, भ्रूण में कई गंभीर अनुवांशिक विकार का पता 20 हफ्ते के बाद ही चल पाता है. इसलिए 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत न होना बेहद सख्त और अनुचित है और ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 21का उल्लंघन करता है.
कानूनी बाध्यता के चलते डॉक्टर भी हैं मजबूर
याचिका में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट की धारा 5 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है. अस्पतालों में डॉक्टर इस धारा का बेहद संकुचित मायने निकलते हैं. 20 हफ्ते बाद अगर किसी अनुवांशिक विकार का पता चलता है और कोई महिला गर्भपात कराना चाहती है तो भी वो इस धारा के चलते गर्भपात नहीं करा सकती. इसलिए ये धारा ऐसे किसी भी बच्चे को जन्म देने में जो शारीरिक और मानसिक तकलीफ उस मां को होती है उसकी अनदेखी करती है.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) कमिटी की रिपोर्ट को अदालत में पेश किया जाए. इस कमिटी में स्वास्थ्य सचिव, नरेश दयाल (पूर्व सचिव, आईसीएमआर) और डॉ एन के गांगुली शामिल हैं.
अस्पतालों में डॉक्टर्स का पैनल बनाने की भी मांग
याचिका में ये भी मांग की गई है की केंद्र सरकार सभी अस्पतालों को निर्देश दे कि वो अपने यहां डॉक्टर्स का एक अतिरिक पैनल बनाएं जो ऐसी बलात्कार पीड़ित लड़कियों और महिला का गर्भपात करा सकें जो 20 हफ्ते से ज्यादा की गर्भवती हों और ऐसा चाहती हों. याचिकाकर्ता एक बलात्कार पीड़ित है और वो 24 हफ्ते की गर्भवती है. बच्चे में 'anencyphaly' नाम का एक विकार है और महिला गर्भपात कराना चाहती है लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं दे रहा.