
संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने किराए की कोख के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरोगेसी (रेगुलेशन) बिल 2019 को मंगलवार को राज्यसभा में पेश कर दिया. जबकि यह बिल लोकसभा में 15 जुलाई में पेश किया गया और 5 अगस्त को पास भी हो गया था. संसद के ऊपरी सदन में इस बिल पर बहस जारी है. हालांकि 'संस्कारी बिल' कहकर इसकी आलोचना की जा रही है क्योंकि यह अकेले रहने वाले पुरुषों और होमोसेक्सुअल पुरुषों के पिता बनने पर रोक लगाता है.
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में दूसरी बार सरकार बनने के बाद नई सरकार के पहले संसदीय सत्र के दौरान जुलाई में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सरोगेसी (रेगुलेशन) बिल 2019 को पेश किया था. मोदी सरकार की ओर से प्रस्तावित सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2019 में कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं.
क्या कहता है सरोगेसी बिल 2019
1. सेरोगेसी बिल के जरिए नेशनल सरोगेसी बोर्ड और स्टेट सरोगेसी बोर्ड का गठन किया जाएगा.
2. सरोगेसी पर निगरानी रखने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करने का भी प्रावधान.
3. यह सुविधा उन्हीं दंपतियों को मिलेगी जिनकी शादी हुए 5 साल या उससे ज्यादा का समय हो गया हो. सिर्फ एक बार ही मिलेगी सुविधा.
4. सरोगेसी सेवा देने वाले सरोगेसी क्लीनिक के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.
5. नियम का उल्लंघन करने पर कम से कम 10 साल जेल की सजा और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
6. विवाहित भारतीय जोड़ों के लिए सिर्फ 'नैतिक परोपकारी सरोगेसी' की अनुमति है. इसके लिए महिला की उम्र 23-50 और पुरुष की उम्र 26-55 के बीच होनी चाहिए. ' नैतिक परोपकारी सरोगेसी' का मतलब यह कि सरोगेट मदर के मेडिकल खर्च और इंश्योरेंस कवर के अलावा यह बिना किसी खर्च के, बिना पैसे या फीस के होनी चाहिए.
7. सरोगेट मदर को लाभार्थी की करीबी रिश्तेदार होनी चाहिए, ऐसी महिला 'जिसकी शादी हो चुकी हो और उसका अपना बच्चा हो' और उसकी उम्र 25-35 साल की होनी चाहिए. कोई भी महिला सिर्फ एक बार ही सरोगेट मदर बन सकती है.
8. इस तरह के गर्भ को तभी हटाया जा सकता है जब सरोगेट मदर की लिखित में अनुमति हो. साथ ही उचित प्राधिकारी की भी अनुमति हो.
9. सरोगेसी बिल सरोगेसी के जरिए पैदा होने वाले बच्चे का परित्याग रोकने का भी प्रावधान करता है और उसके वे सारे अधिकार सुनिश्चित करता है जो कि किसी जैविक पुत्र के होते हैं.
'संस्कारी बिल' पर विरोध
हालांकि यह बिल हर पुरुष के लिए पिता बनने के अधिकार को छीनता है. बिल के प्रावधानों के अनुसार सरोगेसी की सुविधा शादीशुदा दंपति को मिलेगी, जबकि सिंगल, होमोसेक्सुएल पुरुषों के लिए सरोगेसी की सुविधा नहीं होगी. इस कारण इस बिल की आलोचना भी की जा रही है और इसे 'संस्कारी बिल' तक करार दिया जा रहा है. बिल को लेकर सबसे ज्यादा विरोध शादीशुदा दंपति वाले प्रावधान को लेकर ही है.
इसके अलावा यह बिल विदेशी, तलाकशुदा, लिव-इन कपल, विधुर और विधवा लोगों के लिए सरोगेसी की सुविधा लेने पर रोक लगाता है.
2016 में भी पेश हुआ था बिल
मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में 3 साल पहले 2016 में ही सरोगेसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस बिल को संसद में पेश किया था. लेकिन अब इसके नए प्रारूप को सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2019 नाम से पेश किया गया. इस बिल का मकसद है कि किराए के कोख का व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए.
क्या होता है सरोगेसी
दूसरी महिला के कोख को किराए पर लेने को सरोगेसी कहा जाता है. ऐसी मां जो अपनी कोख को किराए पर देकर बच्चे पैदा करती है तो उसे सरोगेट मदर कहते हैं. पिछले लंबे समय से ऐसे आरोप लगने लगे थे कि लोग पैसे के दम पर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की कोख का दुरुपयोग कर रहे हैं. कोख के दुरुपयोग से महिलाओं की सेहत से जुड़ी समस्या पैदा हो रही थी.
राज्यसभा में बिल पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा हाल के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि देशभर में 3000 अवैध क्लीनिक हैं और हर साल 2000 से ज्यादा विदेशी बच्चे पैदा हो रहे हैं.