Advertisement

उत्तराखंड फेक एनकाउंटर: 7 पुलिस वालों को उम्रकैद की सजा, पिता ने कहा- लड़ाई जारी रहेगी

रणवीर के पिता रवींद्र सिंह ने हालांकि हाईकोर्ट के फ़ैसले पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे.

उत्तराखंड फेक एनकाउंटर केस में 7 पुलिसकर्मी दोषी करार (फाइल फोटो) उत्तराखंड फेक एनकाउंटर केस में 7 पुलिसकर्मी दोषी करार (फाइल फोटो)
पूनम शर्मा/आशुतोष कुमार मौर्य
  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 साल की लंबी सुनवाई के बाद उत्तराखंड में 2009 में हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी करार दिए गए पुलिसकर्मियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. हाई कोर्ट ने हालांकि दिल्ली की एक निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए 11 अन्य पुलिसकर्मियों को सबूत के अभाव में दोषमुक्त कर दिया.

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाते हुए 6 जून 2014 को 22 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 18 को हत्या, अपहरण, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उत्तराखंड पुलिस की संलिप्तता के चलते इस केस की जांच सीबीआई से करवाई गई थी.

Advertisement

गौरतलब है कि 3 जुलाई 2009 को पुलिसकर्मियों ने इस फर्जी एनकाउंटर को अंजाम दिया. पुलिस ने गाजियाबाद के रहने वाले 22 साल के एमबीए के छात्र रणवीर सिंह की देहरादून में गोली मारकर हत्या कर दी थी और इसे एनकाउंटर का रंग देने की कोशिश की थी.

पुलिस हालांकि कोर्ट में यह साबित करने में नाकाम रही कि रणवीर वहां किसी वारदात को अंजाम देने आया था. निचली अदालत ने 18 पुलिसकर्मियों को इस फर्जी एनकाउंटर का दोषी पाया था, हालांकि हाईकोर्ट ने 11 पुलिस वालों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया. दोषी करार दिए गए सात पुलिसकर्मियों के पास हालांकि अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का रास्ता बचा हुआ है.

रणवीर के पिता रवींद्र सिंह की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया था. रवींद्र सिंह ने हालांकि हाईकोर्ट के फ़ैसले पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि अभी तक उन्हें इस निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे.

Advertisement

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए पुलिसकर्मियों में डालनवाला कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर एसके जायसवाल, आरा चौकी इंचार्ज जीडी भट्ट, कांस्टेबल अजित सिंह, एसओजी प्रभारी नितिन चौहान, एसओ राजेश बिष्ट, उप निरीक्षक नीरज यादव और चंद्रमोहन शामिल हैं, वहीं सौरभ नौटियाल, विकास बलूनी, सतबीर सिंह, चंद्रपाल, सुनील सैनी, नागेन्द्र राठी, संजय रावत, दारोगा इंद्रभान सिंह, मोहन सिंह राणा, जसपाल गुंसाई और मनोज कुमार को बरी कर दिया है.

रणवीर को मारी थी 22 गोलियां

इस कथित फर्जी मुठभेड में पुलिस ने रणवीर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं. उस समय पुलिस ने मुठभेड़ में 29 राउंड फायरिंग किए जाने का दावा किया था. पांच जुलाई 2009 को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की पोल-पट्टी खोल दी थी. मृतक के शरीर में 22 गोलियों के निशान पाए गए थे.

शरीर में आई चोटों से हुआ खुलासा

रणवीर के शरीर पर मिले चोटों के गहरे निशान से हकीकत का खुलासा हुआ था. यही नहीं रणवीर के शरीर पर 28 चोट के निशान मिले थे. एक्सपर्ट्स का कहना था कि यह चोटें मुठभेड में तो नहीं लगी होंगी.

रणवीर एनकाउंटर की पुलिसिया कहानी

ज्ञात हो कि तीन जुलाई 2009 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल देहरादून आ रही थीं. चैकिंग के दौरान दोपहर बाद सर्कुलर रोड गुरुद्वारा के पास तत्कालीन आराघर चौकी इंचार्ज जीडी भट्ट एक मोटरसाइकिल पर आ रहे तीन युवकों को रोकते हैं. पुलिस के अनुसार युवकों ने चौकी इंचार्ज पर हमला कर सर्विस पिस्टल लूट ली.

Advertisement

पुलिस ने घटनाक्रम का गवाह मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर परवेज आलम को बताया था. दो घंटे बाद ही पुलिस ने हमला कर भागे युवकों में से एक रणवीर सिंह को रायपुर के लाडपुर जंगल में मार गिराने का दावा किया था, जबकि दो अन्य युवक भागने में सफल रहे थे.

पोस्टमार्टम के बाद मामले ने पकड़ा था तूल

देहरादून पहुंचे रणवीर के परिजनों ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया था. परिजनों के अनुसार रणवीर 3 जुलाई के दिन ही देहरादून में नई नौकरी ज्वाइन करने वाला था . अगली सुबह दून हॉस्पिटल के बाहर पुलिस ने रणवीर के परिजनों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया. इसके बाद सरकार ने सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए.

पांच जुलाई 2009 को रणवीर की पीएम की रिपोर्ट आई, जिसमें मौत से पहले गंभीर चोट पहुंचाए जाने की बात पुष्ट हुई. पीएम रिपोर्ट में कुल 28 चोटें और 22 गोलियां लगने की बात सामने आई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, गोली महज तीन फिट की दूरी से मारी गई थी. मामले पर चारों ओर से घिरने और दबाव पड़ने के बाद सरकार ने 31 जुलाई, 2009 को इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी.

कब क्या हुआ

3 जुलाई 2009 को एनकाउंटर में रणवीर की हत्या

Advertisement

4 जुलाई को हत्या का आरोप, हंगामा, परिजनों पर लाठीचार्ज

5 जुलाई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई

5 जुलाई को सीबीसीआईडी को सौंपी गई जांच

6 जुलाई को पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा

7 जुलाई को सीबीसीआईडी की टीम ने शुरू की जांच

8 जुलाई को नेहरु कॉलोनी थाने से रिकार्ड जब्त

8 जुलाई को सरकार की सीबीआई जांच की सिफारिश

31 जुलाई को सीबीआई ने दून आकर शुरू की जांच

4 जून को दिल्ली की विशेष अदालत का फैसला सुरक्षित

6 जून को 18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement