भारत ने गैर-बासमती चावल के निर्यात पर बैन (India Rice Export Ban) क्या लगाया, अमेरिका समेत दुनियाभर के कई देशों में हड़कंप सा मच गया है. ऐसा होना भी था, क्योंकि भारत से दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में चावल का निर्यात होता है. सरकार के इस फैसले के बाद US के सुपर मार्केट्स में एक ओर जहां चावल की कीमतें (Rice Price Rise) आसमान पर पहुंच गई है, तो वहीं स्टोर्स के बाहर ग्राहकों को लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है. लेकिन अमेरिका ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी मुसीबत बढ़ती नजर आ रही है.
160 देशों में है भारतीय चावल की मांग
नोमुरा (Nomura) के मुताबिक, देश से निर्यात होने वाले सभी तरह के चावल की ग्लोबल मार्केट में 40 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं गैर-बासमती राइस का हिस्सा लगभग 25 फीसदी है. देश से दुनियाभर के करीब 160 देशों में चावल का निर्यात किया जाता है. इनमें से प्रमुख रूप से पांच देश अमेरिका, इटली, थाइलैंड, स्पेन और श्रीलंका सबसे बड़े आयातक देश हैं. जो पूरी तरह से भारतीय चावल पर आधारित हैं. इसके अलावा अन्य देशों में सिंगापुर, फिलीपींस, हांगकांग, मलेशिया जैसे देश शामिल हैं.
अमेरिका में चावल की मारमारी
अमेरिका में तो भारत सरकार के इस फैसले के बाद हालात बिगड़ गए हैं, सोशल मीडिया पर जो वीडियो और फोटोग्राफ्स वायरल हो रहे हैं वो चावल की मारामारी की साफ तस्वीर पेश करने के लिए काफी हैं. US के सुपर मार्केट्स में गैर-बासमती चावल को खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ पहुंच रही है और एक-एक आदमी चावल के 10-10 पैकेट खरीद रहा है. इस बीच देश में चावल की कीमतों में भी रातों-रात इजाफा देखने को मिला है, 9 किलोग्राम के एक पैकेट का दाम बढ़कर 27 डॉलर या 2215 रुपये तक पहुंच गया है.
सरकार ने 20 जुलाई को लिया था फैसला
भारत साल 2012 से चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, देश से गैर-बासमती चावल का कुल निर्यात 2022-23 में 4.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था. जो इससे पहले वित्त वर्ष 2021-22 में 3.3 मिलियन रहा था. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में 2023-24 (अप्रैल-जून) में गैर बासमती सफेद चावल लगभग 15.54 लाख टन निर्यात किया गया है, जो पिछले साल 2022-23 (अप्रैल-जून) के मुकाबले 35 फीसदी ज्यादा है. केंद्र सरकार ने बीते 20 जुलाई को बड़ा फैसला लेते हुए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर बैन लगाया था. हालांकि भारत ने बासमती चावल के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.
हर महीने भारत अमेरिका को 6000 टन नॉन बासमती चावल सप्लाई करता है जिसमें से 4000 टन सिर्फ और सिर्फ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भेजे जाते हैं. अगर बात करें APEDA पर मौजूद वित्त वित्त वर्ष 2021-22 और 22-23 में ऊपर बताए गए पांच प्रमुख देशों को निर्यात किए गए भारतीय चावल के डेटा के बारे में तो...
देश | निर्यात FY 21-22 (क्विंटल में) | निर्यात FY 22-23 (क्विंटल में) |
अमेरिका | 1,610,045.76 | 2,040,258.20 |
इटली | 240,340.12 | 283,674.21 |
स्पेन | 37,318.52 | 89,923.49 |
थाइलैंड | 6,507.34 | 22,583.12 |
श्रीलंका | 17,277.00 | 60,009.91 |
सरकार ने क्यों लगाया चावल पर बैन?
सरकार के मुताबिक घरेलू बाजार में चावल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. रिटेल मार्केट में इसका भाव बीते एक साल में 11.5 फीसदी तक बढ़ा है. जबकि बीते महीनेभर में ही चावल 3 फीसदी महंगा हो गया है. इस सबके बीच घरेलू बाजार में चावल की कीमतों में कमी लाने और चावल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पिछले साल 8 अगस्त को नॉन-बासमती सफ़ेद चावल के निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगाया था, इसके बाद अब इसके निर्यात पर बैन लगा दिया गया है.
IMF ने की प्रतिबंध हटाने की अपील
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत द्वारा गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का असर वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है. आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पीएर-ओलिवीए गुहाशां (Pierre-Olivier Gourinchas) ने कहा है कि हम भारत सरकार से चावल के निर्यात पर ऐसे प्रतिबंध हटाने की लिए कहेंगे, क्योंकि इसका असर दुनिया पर पड़ सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा है कि भारत के इस फैसले का असर वैसा ही होगा जैसा काला सागर से यूक्रेन के अनाज निर्यात पर रोक लगाने से हुआ, जिससे दूसरे देशों में गेंहू के दाम बढ़ गए.