वेब सीरीज 'पोचर' की शुरुआत एक हाथी के जंगल में बेरहमी से हुए शिकार से होती है. शिकारी इस विशाल जीव को निर्दयता से गोली मारता है और हाथी जमीन पर बेसुध हो जाता है. उसका खून बहते और उसके दांतों को निकालते देख आपका दिल दुख जाता है. यहीं से एक ट्विस्ट और टर्न्स से भरी जबरदस्त कहानी की शुरुआत होती है. 'पोचर' शुरुआत से ही साफ कर देती है कि ये एक गंभीर मुद्दे पर बनी गंभीर सीरीज है, जो आपको कई ऐसी जगहों पर लेकर जाएगी, जिसे देखकर आप बहुत कुछ महसूस करने वाले हैं.
हाथियों के शिकार की दर्दनाक कहानी
भारत में 1991 में जानवरों के शिकार पर रोक लगा दी गई थी. भारतीय वन्यजीव अधिनियम के तहत ये किया गया था. 1995 में केरल के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने देश के सबसे बड़े हाथियों का शिकार करने रैकेट का पर्दाफाश किया था. इस रैकेट की पहुंचे विदेशों के बड़े और खतरनाक गैंग्स तक थी. सीरीज के डायरेक्टर रिची मेहता ने इस सब्जेक्ट पर गहरी रिसर्च की है और ये बात 'पोचर' को देखकर साफ समझ में भी आती है.
हाथियों के शिकार, हाथी दांत की गैर-कानूनी तस्करी और उससे जोड़े अलग-अलग रिंग्स को आप सीरीज में देखते हैं. इसकी शुरुआत एक शिकारी के खुद को सरेंडर करने से होती है. वो राज नाम के शख्स के बारे में बताता है, जो पुलिस के सामने शिकार छोड़ देने की इमेज बनाकर उनके पीठ पीछे अवैध रूप से हाथियों की हत्या कर रहा है. राज की शुरू होती तलाश होती है. सीनियर फॉरेस्ट अफसर नील (दिबयेन्दु भट्टाचार्य) अपनी एक टीम खड़ी करते हैं, जिनके ऊपर हाथियों के शिकार को रोकने और इसके पीछे छिपे लोगों का पर्दाफाश करने की जिम्मेदारी है.
एक्टर्स ने किया कमाल
फॉरेस्ट अफसर माला जोगी (मिनिषा सजयन) को इस केस की जिम्मेदारी दी जाती है. माला के साथ है एलन (रोशन मैथ्यू), जो कि नंबर्स के साथ-साथ सांपों के एक्सपर्ट भी हैं और एक्ट्रेस कनी कुश्रुति. माला जानवरों से प्यार करती है. ये केस उसके लिए खास है, क्योंकि उसके पिता खुद एक शिकारी रह चुके हैं. अपने पिता के पाप का प्रायश्चित करती और शिकारियों का शिकार करती माला का रास्ता आसान नहीं है. लेकिन फिर भी वो, नील और एलन अपने परिवारों को छोड़ इस सफर पर निकल पड़े हैं, बिना जाने कि आगे उनके रास्ते में क्या-क्या होने वाला है.
मिनिषा सजयन, रोशन मैथ्यू और दिबयेन्दु भट्टाचार्य ने इस सीरीज में बढ़िया काम किया है. तीनों ने अपने किरदारों पर मेहनत की है, जो स्क्रीन पर नजर आती है. एक्ट्रेस कनी कुश्रुति ने भी अपनी भूमिका को अच्छे से निभाया है. जब वो स्क्रीन पर नहीं होतीं तो आप उन्हें मिस करते हो.
रिची का काम है बेमिसाल
डायरेक्टर रिची मेहता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो सीरियस मुद्दों को जरूरी सेंसिटिविटी से परोसना जानते हैं. हां, 'पोचर' बीच मेन थोड़ी ढीली पड़ती है. इसके कई सीक्वेंस ड्रामैटिक भी हैं. लेकिन अपनी इस सीरीज से डायरेक्टर रिची आपको बहुत बड़ी सीख देते हैं. साथ ही आपको उस दर्द को भी महसूस करवाते हैं, जानवरों के साथ हो रही बेरहमी को देखकर आपको होना चाहिए. कुल-मिलाकर 'पोचर' देखना आपके लिए काफी जरूरी है.