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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दफ्तर से बुधवार को एक बयान जारी हुआ. इसमें दावा किया गया कि क्रेमलिन पर दो ड्रोन अटैक किए गए. क्रेमलिन यानी रूस का राष्ट्रपति भवन. रूस ने दावा किया कि इस हमले का मकसद राष्ट्रपति पुतिन की जान लेना था. हालांकि, पहले ही इन दोनों ड्रोन्स को मार दिया गया.
इस हमले के लिए रूस ने पहले यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया था. हालांकि, अब रूस का कहना है कि इस हमले का 'मास्टरमाइंड' तो अमेरिका था और यूक्रेन ने तो वही किया, जो उसे कहा गया. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है.
रूस ने इस हमले को पुतिन की 'हत्या की साजिश' बताया है. क्रेमलिन ने ये भी बताया कि राष्ट्रपति पुतिन पूरी तरह सुरक्षित हैं. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि जिस वक्त ड्रोन हमला हुआ, उस वक्त राष्ट्रपति पुतिन काम कर रहे थे.
कहां बना है बंकर?
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि हमला जिस वक्त हुआ था, उस समय राष्ट्रपति पुतिन मॉस्को के पास नोवो-ओगारयोवा में बने अपने आवास के बंकर में काम कर रहे थे.
नोवो-ओगारयोवो असल में मॉस्को के नजदीक ही रिहायशी इलाका है. ये दशकों पुराना है. यहां रूस की सरकार से जुड़े बड़े-बड़े अफसर रहते हैं. पुतिन भी अपना ज्यादातर समय यहां बने अपने आवास में ही बिताते हैं. इसे रूसी राष्ट्रपति पुतिन का अनाधिकारिक आवास भी कहा जाता है.
नोवो-ओगारयोवो को 1950 के दशक की शुरुआत में बनाया गया गया था. शुरुआत में इसे गेस्ट हाउस, पार्टी और सरकारी कमेटियों के वर्कप्लेस के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था.
1991 के बाद इस पूरे इलाके को सरकारी अफसरों के लिए रिजर्व कर दिया गया. 1999 में जब व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इसे रेनोवेट करवाया. यहां पर जो राष्ट्रपति आवास बना है, उसके चारों ओर 6 मीटर ऊंची दीवारें हैं.
अक्टूबर 2012 में पुतिन ने कहा था कि वो मॉस्को की भीड़-भाड़ से बचने के लिए अपना ज्यादातर समय यहीं बिताते हैं. अप्रैल 2020 में जब मॉस्को के सिटी क्लीनिकल हॉस्पिटल के एक हेड डॉक्टर के कोविड पॉजिटिव होने के बाद पुतिन ने खुद को नोवो-ओगारयोवो में आइसोलेट कर लिया था.
नोवो-ओगारयोवो के इसी घर में बैठकर पुतिन मीटिंग भी करते हैं. अक्सर ऐसे दावे किए जाते हैं कि यहां के घर में पुतिन हमेशा बंकर में ही रहते हैं. हालांकि, क्रेमलिन ने हाल ही में इस दावे को खारिज कर दिया था.
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और कहां-कहां बने हैं बंकर?
पूरे रूस में कई बंकर्स हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे परमाणु हमले को भी फेल कर सकते हैं. इन्हें मैट्रो 2 सिस्टम कहा जाता है. कहा जाता है कि ये शीत युद्ध के दौरान बने थे. सबसे पहले साल 1990 में रूसी रक्षा पत्रकार विक्टर सवेरेव ने इसका पता लगाया, जिसके बाद से एक के बाद एक कई राज खुले.
मैट्रो 2 सिस्टम में बंकर ही नहीं, अंडरग्राउंड गाड़ियां भी चलती हैं, जो सीधे क्रेमलिन से जुड़ी हुई हैं. इस बारे में साल 2010 में रशियन स्ट्रेटजिक रॉकेट फोर्स के पूर्व अधिकारियों ने बयान दिया था कि ये रीयल हैं और ऐसे बंकर हैं, जिनके बारे में कोई देश सोच भी नहीं सकता.
एक और सुविधा भी है, जो खास राष्ट्रपति और उनके परिवार को सुरक्षा देती है. इसे कंटीन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट (COG) कहते हैं. ये अलग तरह के बंकर हैं, जिसमें कथित तौर पर इतनी जगह है कि आराम से सालभर का राशन, दवा, पानी सबकुछ स्टोर हो सके. इसमें कॉन्फ्रेंस रूम, बेडरूम सारी सुविधाएं हैं और ये टनल से जुड़ती हैं ताकि बंकर में रहते राष्ट्रपति को यहां से वहां शिफ्ट भी किया जा सके.
हालांकि, COG के बारे में इंटरनेशनल मीडिया में बात तो खूब होती है, लेकिन ये क्रेमलिन से कितने मीटर या किलोमीटर दूर स्थित है, ये किसी को नहीं पता.
पुतिन के प्राइवेट बंकर भी बने हैं!
दिसंबर 2022 में रूस के खोजी पत्रकारों ने दावा किया था पूरे रूस में कई तरह के बंकर्स बने हुए हैं. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में ये भी दावा किया था कि आधिकारिक बंकर के अलावा पुतिन के अपने निजी बंकर भी बने हुए हैं.
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मॉस्को में जमीन के 200 मीटर के नीचे टनल मिली थीं. ये काफी पुरानी टनल थीं. इनका इस्तेमाल कैदियों को रखने के लिए और कभी-कभी रूस से बाहर निकलने के लिए भी किया जाता था.
पुतिन जब राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इन सुरंगों को रेनोवेट करवाया. यहां जो लिफ्ट लगी थीं, उनकी मरम्मत करवाई गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुरंगों की तीन लिफ्ट की मरम्मत पर ही 5.5 करोड़ रूबल खर्च हुए थे. इन्हें मैट्रो 2 सिस्टम कहा जाता है. कहा जाता है कि ये शीत युद्ध के दौरान बने थे. सबसे पहले साल 1990 में रूसी रक्षा पत्रकार विक्टर सवेरेव ने इसका पता लगाया, जिसके बाद से एक के बाद एक कई राज खुले.
रूसी पत्रकारों ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि जिन कामगारों ने आधिकारिक बंकरों का निर्माण किया था, उन्होंने ही पुतिन के लिए प्राइवेट बंकर भी बनाए थे.
कहां तक फैला है बंकरों का नेटवर्क?
पुतिन के बंकरों का ये नेटवर्क पूरे रूस में फैला हुआ है. खोजी पत्रकारों की रिपोर्ट बताती है कि मॉस्को में कई सारी छिपी हुई सुरंगें हैं. मैट्रो-2 सिस्टम मॉस्को खासकर क्रेमलिन से जुड़ी हुई हैं. इसके अलावा ये सिस्टम बालाशिका, चेकोव और कालुगा शहर को भी जोड़ती हैं.
खोजी पत्रकारों का मानना है कि उराल में मेझगोरये नाम का छिपा हुआ शहर है. यहीं पर यमांताऊ की पहाड़ियों पर भी एक बंकर है. यहां पर 20-20 किलोमीटर की दूरी पर दो सैन्य ठिकाने भी हैं. आमतौर पर यहां पर एक बार में इस बंकर में 15 हजार लोग रह सकते हैं. ये बंकर इस तरह से बने हुए हैं कि परमाणु हमले का भी इन पर कोई असर नहीं होता.
पत्रकारों का दावा था कि मॉस्को में दर्जनों जगहों पर ऐसी सुविधाएं हैं जो लुचनीकोव लेन (खुफिया एजेंसी FSB के हेडक्वार्टर के पास), क्रेस्टोवोजविजहेंस्की लेन (रक्षा मंत्रालय के पास) और तागांका (स्टालिन के बंकर के पास) को जोड़ती हैं. ऐसा दावा भी है कि मॉस्को के नीचे एक तरह से पूरी अंडरग्राउंड सिटी बनी हुई है जो क्रेमलिन से जुड़ी है. इसके अलावा, गेलेंदजिक शहर में पुतिन का एक पैलेस भी है और यहां भी अंडरग्राउंड शेल्टर बना है.
साइबेरिया में भी बना रखी है अंडरग्राउंड सिटी!
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइबेरिया के ओंगुडेस्की शहर में भी एक अंडरग्राउंड सिटी बनाकर रखी है. पिछले साल जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग छेड़ी थी तो दावा किया गया था कि पुतिन ने अपने पूरे परिवार को साइबेरिया के इसी घर में भेज दिया है.
खास बात ये है कि ये अंडरग्राउंड सिटी जहां बनी है, वो मंगोलिया, चीन और कजाकिस्तान की सीमा से सटा है. बाकी बंकरों की तरह ही ये भी उतना ही सुरक्षित है कि परमाणु हमले तक को झेल सकता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइबेरिया में इस अंडरग्राउंड सिटी को रूस की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी गजप्रोम ने 10 साल पहले बनाया था.
ऐसा दावा किया जाता है कि पुतिन की दोनों बेटियां- मारिया और कैटरिना भी अलग पहचान से यहां रहतीं हैं.