अमेरिका में एक कैदी को नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा दी जाएगी. अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार होगी.
जिस कैदी को नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा दी जाएगी, उसका नाम केनेथ यूगिन स्मिथ है. उसे 1996 में मौत की सजा सुनाई गई थी. 2022 में उसे जहर वाला इंजेक्शन भी दिया गया था, लेकिन वो इससे बच गया था.
स्मिथ को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है. उस पर 1988 में एक व्यक्ति से पैसे लेकर उसकी पत्नी की हत्या करने का आरोप था. मामले में दो लोगों को दोषी ठहराया गया था.
स्मिथ को 25 जनवरी को मौत की सजा दी जानी है. उसके वकीलों ने कोर्ट में इसे चुनौती दी है और इसे टॉर्चर बताया है. उसके वकीलों का कहना है कि स्मिथ पर एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है. उन्होंने दलील दी कि ये तरीका न सिर्फ रिस्क से भरा है, बल्कि ये संवैधानिक उल्लंघन भी है.
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस पर आपत्ति जताई है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे अमानवीय और क्रूर बताते हुए सजा पर रोक लगाने की मांग की है.
बहरहाल, सरकार का कहना है कि इस तरीके से तुरंत बेहोशी आ जाएगी. लेकिन इसका विरोध करने वालों का तर्क है कि ये तरीका पहला कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है और उन्होंने इसकी 'ह्यूमन एक्सपेरिमेंट' से तुलना की है.
ऐसे दी जाएगी मौत की सजा
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सबसे पहले स्मिथ को एक स्ट्रेचर पर लेटा दिया जाएगा. इसके बाद उसके चेहरे पर एक मास्क लगाया जाएगा. ये ठीक उसी तरह का मास्क होगा, जैसा किसी इंडस्ट्री में काम करने वाले वर्कर को ऑक्सीजन की ठीक सप्लाई के लिए लगाया जाता है.
इसके बाद उसकी आखिरी इच्छा पूछी जाएगी. सबसे आखिर में नाइट्रोजन गैस छोड़ दी जाएगी. मास्क के जरिए नाइट्रोजन सीधे उसके शरीर के अंदर जाएगी. मास्क लगे होने की वजह से उसे ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और उसकी मौत हो जाएगी.
मास्क के जरिए कम से कम 15 मिनट तक उसे नाइट्रोजन दी जाएगी. सरकारी वकील ने कोर्ट में बताया कि नाइट्रोजन गैस की वजह से कुछ सेकंड में ही वो बेहोश हो जाएगा और कुछ मिनटों में ही उसकी मौत हो जाएगी.
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क्यों है ये खतरनाक?
नाइट्रोजन गैस का न तो कोई कलर होता है और न ही कोई गंध होती है. हम जो सांस लेते हैं, उसमें भी 78% नाइट्रोजन गैस ही होती है. लेकिन क्योंकि हम ऑक्सीजन भी साथ में लेते हैं, इसलिए ये खतरनाक नहीं होती.
लेकिन ये तब खतरनाक हो जाती है, जब साथ में ऑक्सीजन नहीं मिलती. अगर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाए और हवा में 100% नाइट्रोजन हो तो किसी की भी मौत हो सकती है. स्मिथ की मौत ऐसे ही होगी. उसे ऑक्सीजन नहीं मिलेगी.
स्मिथ के वकीलों ने अदालत में दलील दी है कि सरकार जिस मास्क का इस्तेमाल कर रही है, वो एयर टाइट नहीं है और उससे ऑक्सीजन लीक होने का खतरा भी है. उन्होंने दलील दी कि हो सकता है कि इससे स्मिथ की मौत न हो और वो कोमा में चला जाए.
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लेकिन नाइट्रोजन से मौत की सजा क्यों?
अमेरिका में अब तक जहर का इंजेक्शन देकर मौत की सजा दी जाती रही है. लेकिन अब वहां मौत की सजा देने के लिए नए तरीकों को तलाशा जा रहा है.
साल 2018 में अलबामा के साथ-साथ मिसिसिपी और ओक्लाहोमा ने भी नाइट्रोजन से मौत की सजा दिए जाने को मंजूरी दे दी थी.
नवंबर 2022 में स्मिथ को जहरीला इंजेक्शन देकर मौत की सजा देने की कोशिश की गई थी. लेकिन डॉक्टरों को उसकी नस ही नहीं मिल पा रही थी. इस कारण इसे टाल दिया गया. स्मिथ के वकीलों ने दावा किया था कि उसे चार घंटों तक बांधकर रखा गया था.
संयुक्त राष्ट्र ने जताई है आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने मौत की सजा के लिए ऐसी प्रक्रिया अपनाने पर आपत्ति जताई है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे अमानवीय और क्रूर बताया है.
इससे पहले साल 2020 में अमेरिकन वेटरिनरी मेडिकल एसोसिशन ने भी नाइट्रोजन से मौत की सजा पर गाइडलाइन जारी की थी. इसने कहा था कि कुछ विशेष परिस्थितियों में इस तरीके से सिर्फ सुअर को मारा जा सकता है, बाकी दूसरे जीवों को नहीं, क्योंकि इसके कई खतरनाक नतीजे हो सकते हैं.
जब हाइड्रोजन साइनाइड से दी गई थी मौत
अमेरिका में कुछ साल पहले तक कुछ कैदियों को हाइड्रोजन साइनाइड गैस के जरिए भी मौत की सजा दी जाती थी. अमेरिका में आखिरी बार 1999 में वॉल्टर ला ग्रांड को इस तरीके से मौत की सजा दी गई थी. दावा है कि इस तरीके से उसकी मौत 18 मिनट में हुई थी. वॉल्टर ला ग्रांड को हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी.