Mental Health: Daydreaming अच्छा या बुरा? जानें मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे डालता है असर
अक्सर हम ख्वाबों की दुनिया में इतना खो जाते हैं कि असल जिंदगी से दूरी बना लेते हैं. ये ख्याल हमें सुकून देते हैं लेकिन कई स्थिति में ये ठीक नहीं होता. आइए जानते हैं Daydreaming का मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे असर डालता है.
कई बार हम अक्सर वो चीजें इमेजिन करने लगते हैं, जो हमें पसंद हैं. चाहे वो पसंदीदा खाना हो, घर हो या पसंद की नौकरी हो. खुली आंखों से ख्वाब तो सब देखते हैं लेकिन अक्सर हम ख्वाबों की दुनिया में इतना खो जाते हैं कि असल जिंदगी से दूरी बना लेते हैं. दिन के उजाले में बैठे-बैठे अपने सपनों और फैंटेसी दुनिया में खो जाना भी ख्वाब देखना है. इसे डे-ड्रीमिंग कहा जाता है, जिसे हिंदी में दिवास्वप्न कहते हैं. ये ख्याल हमें सुकून देते हैं लेकिन कई स्थिति में ये ठीक नहीं होता. आइए जानते हैं, ये स्थिति मेंटल हेल्थ के लिए कितनी सही है.
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डे-ड्रीमिंग यानी दिवास्वप्न के लक्षण
ज्यादा समय ख्यालों में खोए रहना और जरूरी काम को नजरअंदाज करना
ख्यालों पर कंट्रोल करना मुश्किल होना
डे-ड्रीमिंग की वजह से तनाव और हानि झेलना
बहुत मुश्किलों के बाद भी डे-ड्रीमिंग को ना रोक पाना