scorecardresearch
 

'स्थिति स्थिर, लेकिन सामान्य नहीं', पूर्वी लद्दाख में चीन से चल रहे गतिरोध पर बोले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

जनरल द्विवेदी ने चीन के प्रति भारतीय सेना के समग्र दृष्टिकोण पर भी संक्षेप में बात की. उन्होंने कहा, "जहां तक ​​चीन का सवाल है, यह काफी समय से हमारे दिमाग में कौंध रहा है. और मैं कहता रहा हूं कि चीन के साथ आपको प्रतिस्पर्धा करनी होगी, आपको सहयोग करना होगा, आपको सह-अस्तित्व में रहना होगा, आपको टकराव करना होगा और मुकाबला करना होगा."

Advertisement
X
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (फाइल फोटो)
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (फाइल फोटो)

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को लद्दाख में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच चल रहे गतिरोध के बीच कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति स्थिर है, लेकिन सामान्य नहीं है और संवेदनशील बनी हुई है. उन्होंने कहा, हालांकि दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ता से सकारात्मक संकेत" मिल रहे हैं, लेकिन किसी भी योजना का क्रियान्वयन जमीन पर सैन्य कमांडरों पर निर्भर करता है."

Advertisement

पीटीआई के मुताबिक जनरल द्विवेदी ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग पर एक पर्दा उठाने वाले कार्यक्रम में कहा कि पूरे मामले में विश्वास सबसे बड़ी क्षति बन गया है. उन्होंने कहा, "स्थिति स्थिर है, लेकिन यह सामान्य नहीं है और यह संवेदनशील है. अगर ऐसा है तो हम क्या चाहते हैं. हम चाहते हैं कि अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति बहाल हो." 

दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध मई 2020 की शुरुआत में शुरू हुआ था. सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो पाया है, हालांकि दोनों पक्ष कई टकराव बिंदुओं से अलग हो गए हैं.

सेना प्रमुख ने कहा, "जब तक स्थिति बहाल नहीं हो जाती, जहां तक ​​हमारा संबंध है, स्थिति संवेदनशील बनी रहेगी और हम किसी भी तरह की आकस्मिकता का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं."

Advertisement

उन्होंने जमीन पर सैनिकों, एलएसी के साथ बफर जोन और योजना के अनुसार सैनिकों द्वारा गश्त फिर से शुरू करने जैसे कई लंबित मुद्दों को सूचीबद्ध किया. जनरल द्विवेदी ने चीन के प्रति भारतीय सेना के समग्र दृष्टिकोण पर भी संक्षेप में बात की. उन्होंने कहा, "जहां तक ​​चीन का सवाल है, यह काफी समय से हमारे दिमाग में कौंध रहा है. और मैं कहता रहा हूं कि चीन के साथ आपको प्रतिस्पर्धा करनी होगी, आपको सहयोग करना होगा, आपको सह-अस्तित्व में रहना होगा, आपको टकराव करना होगा और मुकाबला करना होगा." 

बता दें कि भारत और चीन ने जुलाई और अगस्त में दो दौर की कूटनीतिक वार्ता की, जिसका उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर अपने गतिरोध में लंबित मुद्दों का जल्द समाधान निकालना था. जनरल द्विवेदी ने कहा, "कूटनीतिक पक्ष से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन हमें यह समझने की जरूरत है कि कूटनीतिक पक्ष विकल्प और संभावनाएं देता है." 

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, "लेकिन जब जमीन पर क्रियान्वयन की बात आती है, जब यह जमीन से संबंधित होता है, तो यह दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों पर निर्भर करता है कि वे निर्णय लें." 

थल सेनाध्यक्ष ने देपसांग और डेमचोक में विवादों का भी जिक्र किया और कहा कि सभी लंबित मुद्दे विचाराधीन हैं. उन्होंने कहा, "उत्तरी मोर्चे पर जो कुछ भी कल्पना की जा सकती है, वह विचाराधीन है और इसमें देपसांग और डेमचोक भी शामिल हैं." 

Advertisement

भारत के साथ सीमा पर चीन द्वारा गांवों के निर्माण के बारे में पूछे जाने पर सेना प्रमुख ने कहा कि देश कृत्रिम आव्रजन और बस्तियां बना रहा है. उन्होंने कहा, "कोई समस्या नहीं है, यह उनका देश है. उन्होंने कहा कि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आदर्श गांव भी हैं.

उन्होंने कहा, "लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब राज्य सरकारों को उन संसाधनों को लगाने का अधिकार दिया गया है और यह वह समय है जब सेना, राज्य सरकारें और केंद्र सरकार द्वारा पर्यवेक्षण सभी एक साथ आ रहे हैं."

सेना प्रमुख ने कहा कि अब जो आदर्श गांव बनाए जा रहे हैं, वे और भी बेहतर होंगे. उन्होंने कहा कि एलएसी के करीब कोई चीनी आबादी नहीं है और यही कारण है कि बीजिंग कृत्रिम आव्रजन कर रहा है.

Live TV

Advertisement
Advertisement