सुप्रीम कोर्ट में लगभग ढाई साल बाद संविधान पीठ बैठेगी. सुप्रीम कोर्ट में 29 अगस्त से पांच जजों की संविधान पीठ एक के बाद एक पूरे 25 मामलों की सुनवाई शुरू करेगी जिनके तार संविधान की व्याख्या से जुड़े हैं. इसे नए चीफ जस्टिस की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट में एक नई कार्यशैली का आगाज माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी की गई सूचना के मुताबिक 25 मामलों को सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है. जस्टिस यूयू ललित 27 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे और 29 अगस्त बतौर CJI उनके कामकाज का पहला दिन होगा.
सूचीबद्ध मामलों की बात करें तो संविधान के 103 वें संशोधन अधिनियम, 2019 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका के साथ ही कई अन्य मामले भी इसमें शामिल हैं. इस अधिनियम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है.
इसके अलावा संविधान पीठ WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी और उसके यूजर्स की निजता के अधिकार से जुड़ी याचिका पर भी सुनवाई करेगी. सहमति से दोनों पक्षों के बीच विवाह भंग करने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की शक्ति की व्याख्या पर भी संविधान पीठ सुनवाई करेगी.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आंध्र प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के सभी सदस्यों को पिछड़ा वर्ग के हिस्से के रूप में घोषित करने वाले राज्य के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका भी सुनेगी.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ पंजाब में सिखों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई करेगी. इतना ही नहीं, जस्टिस उदय उमेश ललित के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के तौर पर 27 अगस्त से शुरू होने वाले कार्यकाल में मृत्यु दंड की समीक्षा के लिए सूचीबद्ध किए गए 40 मामलों की फाइल पर भी सुनवाई होगी.