जिस तरह से ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) बढ़ रही है, दुनिया के सभी देश पृथ्वी के तापमान को कम करने की कोशिशों में लग गए हैं. लेकिन हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट (United Nations report) जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भले ही देश ईमानदारी से प्रयास करें, लेकिन 2010 के स्तर की तुलना में, वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse gas emissions) 2030 तक 10.6% बढ़ जाएगा.
यूएन इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज का कहना है कि वार्मिंग को 1.5 सेल्सियस तक सीमित करने के लिए, 2030 तक उत्सर्जन में 43 प्रतिशत की कमी करनी होगी. विशेषज्ञों ने कहा कि इसके लिए तुरंत एक्शन लेने की ज़रूरत है. आपको बता दें कि 6 नवंबर से COP27 जलवायु शिखर सम्मेलन (COP27 climate summit) के लिए दुनिया के तमाम नेता, मिस्र के शर्म अल-शेख में इकट्ठा हो रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील (Simon Stiell) ने कहा कि पिछले साल ग्लासगो में यूएन क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में, सभी देश अपनी जलवायु योजनाओं पर फिर से विचार करने और उन्हें मजबूत करने के लिए सहमत हुए थे. COP26 के बाद से केवल 24 नई या अपडेट की गई जलवायु योजनाएं ही सबमिट की गईं, जो कि निराशाजनक है. इनमें बोलीविया, वानुअतु और युगांडा के साथ-साथ भारत और इंडोनेशिया जैसे बड़े उत्सर्जक देश भी शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही सभी देश 23 सितंबर, 2022 तक UNFCCC को सौंपे गए अपने जलवायु वादों को पूरा कर लें, फिर भी वैश्विक तापमान में 2.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी. हालांकि यह 2015 के पेरिस समझौते के तहत, 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से बहुत दूर है, पर यह पिछले साल के आकलन से बेहतर है.
2021 के आकलन में पाया गया कि अनुमानित ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन 2030 के बाद भी बढ़ना जारी रहेगा. इससे यह भी पता चला है कि 2010 के स्तर की तुलना में, देश 2030 तक उत्सर्जन में 13.7% की वृद्धि करेंगे. नए असेसमेंट से पता चलता है कि मौजूदा प्रतिबद्धताओं से 2010 के स्तर की तुलना में, 2030 तक उत्सर्जन में 10.6% की वृद्धि होगी.