कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक. हिमालय का 2500 km से लंबा इलाका. चौड़ाई 150 से 350 km तक. सिंधु घाटी के नंगा पर्वत (Nanga Parvat) से उत्तर-पूर्व के नामचा बरवा (Namcha Barwa) तक. अगर आप हिमालय को ऊपर से देखें तो आपको दिखेगा कि यह पूरी बेल्ट भारत की तरफ लटकी हुई है. यानी कटोरे जैसा फॉर्मेशन. पिछले 24 घंटे में 4 से 6 तीव्रता के कुल पांच भूकंप आए हैं.
ये वही हिमालय है जहां पर 8 किलोमीटर से ऊंची दुनिया की 14 चोटियों में से 10 मौजूद हैं. साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे इलाकों वाला हिमालय तब बना था, जब भारतीय प्लेट की टक्कर यूरेशियन प्लेट से हुई. पृथ्वी के सबसे ऊपरी परत यानी क्रस्ट (Crust) के सिकुड़ने की वजह से हिमालय के पहाड़ बने. विभिन्न स्थानों पर इनकी मोटाई अलग-अलग है.
अगर हिमालय के उत्तर-पश्चिम की तरफ देखें तो हिंदूकुश, पामीर और नंगा पर्वत इलाके में क्रस्ट की मोटाई 75 km है. जबकि जम्मू और कश्मीर में 60 किलोमीटर है. हिमाचल प्रदेश में मात्र 51 किलोमीटर है. यानी इस इलाके में आते-आते गहराई कम होती जा रही है. जबकि ऊंचे हिमालय और तिब्बत की तरफ क्रस्ट वापस 75 किलोमीटर गहरा है. यानी हिमाचल के बाद से नेपाल तक क्रस्ट के अंदर एक कटोरे जैसी आकृति बनी है, जहां ऊर्जा स्टोर हो रही है.
हिमालय दुनिया का युवा पहाड़ी इलाका
हिमालय दुनिया का सबसे युवा पहाड़ी इलाका है. इसका पूरा इलाका एक अर्धचंद्राकार आकृति में दिखता है. नंगा पर्वत के पास ऊंचाई 8114 मीटर है. जबकि नामचा बरवा के पास 7755 मीटर है. ऊपर चीन, तिब्बत है. नीचे गंगा के मैदानी इलाके हैं. असल में इंडियन टेक्टोनिक प्लेट (Indian Tectonic Plate) हर साल 15 से 20 mm की गति से तिब्बतन प्लेट (Tibetan Tectonic Plate) की तरफ बढ़ रहा है.
जब जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा किसी अपने से बड़े टुकड़े को धकेलेगा, तो कहीं न कहीं तो ऊर्जा स्टोर होगी. तिब्बत की प्लेट खिसक नहीं पा रही हैं. इसलिए दोनों प्लेटों के नीचे मौजूद ऊर्जा निकलती है. ये ऊर्जा छोटे-छोटे भूकंपों के रूप में निकलती है, तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन यही ऊर्जा तेजी से निकलती है, तो आधे भारत, पूरे नेपाल, पाकिस्तान, चीन, म्यांमार तक असर देखने को मिल सकता है.
क्या कहते हैं IIT Roorkee के साइंटिस्ट?
IIT Roorkee के अर्थ साइंसेज विभाग के साइंटिस्ट प्रो. कमल ने बताया कि अगर मैं आपको धक्का दूं. लेकिन आपके पीछे दीवार है. इसलिए आप कहीं जा नहीं सकते. मेरे धकेलने से आपके शरीर में ऊर्जा स्टोर हो रही है. आपको दर्द हो रहा है. जैसे ही आप इस दर्द से बचने के लिए रिएक्ट करेंगे. यानी ऊर्जा स्टोरेज को रिलीज करेंगे. झिड़केंगे. पलटकर मुझे धक्का देंगे, तब शरीर कांपेंगा. यानी कंपन होगी. बस यही भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और तिब्बतन प्लेट के बीच हो रहा है.
पाकिस्तान से लेकर भारत के उत्तर-पूर्व के राज्यों तक हिमालय की पूरी बेल्ट में भूकंप का आना बेहद सामान्य घटना है. एक दूसरे को धक्का देने वाले हालात बने हैं एशियाई देशों के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स के अंदर. हिमालयन रीजन में बहुत ज्यादा एनर्जी स्टोर है. ये धीरे-धीरे रिलीज होती रहे तो बेहतर है. एकसाथ निकलेगी तो भयानक तबाही होगी.
अगर तेजी से ऊर्जा रिलीज हुई तो भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल समेत कई एशियाई देशों की ऊपरी जमीन (Crust) सह नहीं पाएगी. क्रस्ट पर बनी ऊंची इमारतों के ढहने की आशंका रहेगी. सड़कों के टूटने और हिस्सों में बंटने की आशंका बनी रहेगी. इन भूकंपों की वजह तिब्बती प्लेट का रेजिस्ट करना है.
500 km की यात्रा 5-10 मिनट में करती है भूकंप की लहर
मान लीजिए अगर लखनऊ में भूकंप 6 तीव्रता का भूकंप आता है. तो उसकी पहली लहर नोएडा आते-आते करीब 5 से 10 मिनट लग जाएंगे. लेकिन तीव्रता कम हो जाएगी. जरूरी नहीं कि रिक्टर पैमाने पर दिल्ली में तीव्रता उतनी ही रहे. इसलिए झटका दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का झटका लखनऊ की तुलना में हल्का महसूस होगा. आपको यह जानना जरूरी है कि देश का 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के झटकों से नुकसान हासिल कर सकता है.
दिल्ली-NCR के लोगों के लिए ज्यादा खतरा... ये जानना जरूरी
दिल्ली-NCR भूकंप के पांचवें और चौथे जोन में है. यहां के लोगों को सतर्क रहने की ज्यादा जरूरत है. क्योंकि हम भूकंप को न रोक सकते हैं, न टाल सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे देश में भूकंप से संबंधित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाए जाएं. पाकिस्तान के हिंदूकुश में भूकंप आता है तो हमें 5 मिनट बाद पता चलता है कि भूकंप आया है.
यानी एक लहर आती है. अगर हमारे पास एक सिग्नल आता है कि भूकंप आ गया है, इस इलाके को यह इतनी देर में हिला देगा. तो इसे कहते हैं अर्ली वॉर्निंग. हम इसके जरिए लोगों को बचा सकते हैं. उत्तराखंड में IIT Roorkee ने ऐसा सिस्टम लॉन्च किया है. IIT Roorkee ने अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को लेकर एक एप विकसित किया है. इसका नाम है उत्तराखंड भूकंप अलर्ट (Uttarakhand Bhookamp Alert).
इस एप में एक अलार्म है, जो भूकंप आने पर बजेगा. यानी जैसे ही अलार्म बजे आप तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाइए. इसके अलावा अर्ली वॉर्निंग नोटिफिकेशन मैसेज भी आएंगे. क्योंकि उत्तराखंड में अगर भूकंप आता है तो Delhi-NCR के लोगों को असर हो सकता है. लोग इस एप को प्लेस्टोर या एपल आईस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.
भारत में इस साल अब तक आए 948 भूकंप
भारत में इस साल जनवरी से सितंबर तक 948 बार भूकंप आए हैं. रिक्टर पैमाने पर 240 बार भूकंप की तीव्रता 4 के ऊपर थी. यानी इतनी बार लोगों को धरती के कांपने का पता चला. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक इस साल उनके पास मौजूद 152 स्टेशनों से 1090 बार भूकंप आने की जानकारी मिली. लेकिन सिर्फ 948 बार ऐसे भूकंप रिकॉर्ड हुए जो भारत और उसके आसपास के एशियाई देशों में पैदा हुए.
जनवरी से सितंबर तक यानी 9 महीने में 948 भूकंप. यानी हर महीने करीब 105 से ज्यादा भूकंप के झटके आए. चार तीव्रता के नीचे के भूकंपों का पता नहीं चलता. जिन भूकंपों की कंपकंपी महसूस होती है वो चार से ऊपर के होते हैं. यानी 4.0 से लेकर 6 या 7 या 8 या उससे ऊपर.
देश में भूकंप के 5 जोन, इस हिस्से में ज्यादा खतरा
पांचवें जोन में देश के कुल भूखंड का 11% हिस्सा आता है. चौथे जोन में 18% और तीसरे और दूसरे जोन में 30%. सबसे ज्यादा खतरा जोन 4 और 5 वाले इलाकों को है. एक ही राज्य के अलग-अलग इलाके कई जोन में आ सकते हैं. सबसे खतरनाक जोन है पांचवां.
पांचवें जोन में जम्मू और कश्मीर का हिस्सा (कश्मीर घाटी), हिमाचल प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा, उत्तराखंड का पूर्वी हिस्सा, गुजरात में कच्छ का रण, उत्तरी बिहार का हिस्सा, भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं.
चौथे जोन में जम्मू और कश्मीर के शेष हिस्से, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाकी हिस्से, हरियाणा के कुछ हिस्से, पंजाब के कुछ हिस्से, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से, बिहार और पश्चिम बंगाल का छोटा हिस्सा, गुजरात, पश्चिमी तट के पास महाराष्ट्र का कुछ हिस्सा और पश्चिमी राजस्थान का छोटा हिस्सा इस जोन में आता है.
तीसरे जोन में आता है केरल, गोवा, लक्षद्वीप समूह, उत्तर प्रदेश और हरियाणा का कुछ हिस्सा, गुजरात और पंजाब के बचे हुए हिस्से, पश्चिम बंगाल का कुछ इलाका, पश्चिमी राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार का कुछ इलाका, झारखंड का उत्तरी हिस्सा और छत्तीसगढ़. महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक का कुछ इलाका.
जोन-2 में आते है राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु का बचा हुआ हिस्सा. पहले जोन में कोई खतरा नहीं होता. इसलिए हम उसका जिक्र नहीं कर रहे हैं.