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50 हजार साल बाद पहली बार धरती की ओर आ रहा है हिमयुग के समय का धूमकेतु, फरवरी में दिखेगा अद्भुत नजारा

वैज्ञानिक हैरान हैं क्योंकि धरती की ओर पहली बार ऐसा धूमकेतु आ रहा है, जो 50 हजार साल पहले आया था. यह फरवरी महीने में पृथ्वी के 4.20 करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. आसमान साफ रहेगा तो आप इसे नंगी आंखों से देख सकेंगे. इसके बाद यह कब दिखाई देगा यह बता पाना मुश्किल है.

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ये धूमकेतु इससे पहले तब आया था, जब धरती निएंडरथल मानव रहा करते थे. (प्रतीकात्मक फोटोः अन्स्प्लैश)
ये धूमकेतु इससे पहले तब आया था, जब धरती निएंडरथल मानव रहा करते थे. (प्रतीकात्मक फोटोः अन्स्प्लैश)

अगले महीने यानी फरवरी में अंतरिक्ष से ऐसा मेहमान आ रहा है, जो इससे पहले हिमयुग में आया था. यानी करीब 50 हजार साल पहले. इसके बाद ये कब आएगा ये बता पाना मुश्किल है. लेकिन अगला चक्कर 50 हजार साल बाद ही लगेगा. यह एक धूमकेतु (Comet) है. अगर आपके इलाके में आसमान साफ रहेगा तो आप इसे नंगी आंखों से देख सकते हैं. इसे देखने के लिए किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की जरुरत नहीं पड़ेगी. 

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इस धूमकेतु का नाम है C/2022 E3 (ZTF). इसे पिछले साल मार्च में खोजा गया था. तब से लगातार इसे खोजने वाली कैलिफोर्निया की ज्विकी ट्रांसजिएंट फैसिलिटी के वैज्ञानिक इसकी ट्रैकिंग कर रहे हैं. यह 12 फरवरी को धरती से करीब 4.20 करोड़ किलोमीटर दूर से निकलेगा. इसके पहले यह 50 हजार साल पहले अपर पैलियोलिथिक काल (Upper Paleolithic Period) में आया था. तब हिमयुग था. हम इंसानों की आधुनिक प्रजाति यानी होमो सेपियंस भी नहीं थे. 

Ice Age Comet

उस समय निएंडरथल मानव धरती पर घूमते थे. हाथी की जगह मैमथ (Mammoths) होते थे. उस समय प्रदूषण नहीं होता था. आसमान साफ रहता था. हो सकता है हमारे पूर्वजों ने इस धूमकेतु को देखा हो. हमारी किस्मत अच्छी है कि ये इस दौर में धरती के पास से गुजर रहा है. हम इसे देख पाएंगे. ये काफी तेज रोशनी वाला धूमकेतु है. आमतौर पर धूमकेतुओं के आने-जाने, चमकने को लेककर भविष्यवाणी नहीं कर सकते. ये कई बार अपनी दिशा बदल भी लेते हैं. 

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अगर आप धरती के उत्तरी गोलार्ध में रहते हैं तो इसे देख सकते हैं. आसमान डार्क और साफ रहेगा तो खुली आंखों से. नहीं तो दूरबीन या टेलिस्कोप की मदद ले सकते हैं. इसे देखने के लिए सबसे सटीक समय होगा सुबह होने से ठीक पहले. यह आपको आसमान उत्तर-पश्चिम की तरफ जाता हुआ दिखाई देगा. दक्षिणी गोलार्ध के लोगों को यह सिर्फ फरवरी के शुरुआती दिनों में ही दिखेगा. इसके पहले 21 जनवरी को भी मौका मिल सकता है. उस दिन नया चांद होगा. 

उससे पहले आसमान में ज्यादा अंधेरा रहेगा. अगर मौसम विलेन न बने तो आप इस प्राचीन धूमकेतु को आराम से देख सकते हैं. सोचिए इस बार यह अपना पहला चक्कर पूरा कर रहा है सूरज के चारों तरफ. यानी यह अब अगली बार फिर 50 हजार साल बाद ही आएगा. इतने सालों की यात्रा से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हम ब्रह्मांड में कितने छोटे हैं.

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