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हवा से कार्बन डाईऑक्साइड खींच लेगा ये प्लांट, कम हो सकती है ग्लोबल वार्मिंग

बढ़ रहे कार्बन उत्सर्जन से निपटने के लिए एक स्टार्टअप कंपनी बहुत बड़ा प्लांट लगाने जा रही है. यह प्लांट वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड खींच लेगा. जानिए कहां बनने जा रहा है ये प्लांट और किस तरह करेगा काम.

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हवा से कार्बन डाइऑक्साइड खींच लेगा यह प्लांट (Photo: Reuters)
हवा से कार्बन डाइऑक्साइड खींच लेगा यह प्लांट (Photo: Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यह प्लांट आइसलैंड में लगने जा रहा है
  • हर साल हवा से 36,000 टन कार्बन डाईऑक्साइड खींचेगा

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के इस चुनौती भरे दौर में, एक कंपनी इस समस्या का हल लेकर आई थी. इस कंपनी ने ऐसा प्लांट बनाया जो वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) खींचता है और इसे भूमिगत जमा करता है. 

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अब ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने वाला ये स्विस स्टार्टअप क्लाइमवर्क्स एजी (Climeworks AG), अपना दूसरा बड़ा डायरेक्ट एयर कैप्चर (Direct air capture-DAC) प्लांट आइसलैंड में लगने जा रहा है. इनका कहना है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा प्लांट बन सकता है. 

Direct air capture
कंपनी एक प्लांट पिछले साल लगा चुकी है  (Photo: Climeworks)

यह प्लांट 18-24 महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा. और इसकी खास बात यह है कि इसमें हर साल हवा से 36,000 टन कार्बन डाईऑक्साइड खींचने की क्षमता होगी. यह क्लाइमवर्क्स के मौजूदा डीएसी प्लांट से 10 गुना बड़ा होगा. फिलहाल मौजूदा प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा प्लांट है.

Direct air capture
हर साल 36,000 टन कार्बन डाईऑक्साइड खींचेगा प्लांट ​​​​​​(Photo: Climeworks)

इस प्लांट को 'मैमथ' प्लांट कहा जा रहा है. इसमें पंखे और फिल्टर के करीब 80 बड़े ब्लॉक होंगे, जो हवा से CO2 निकालेंगे. आइसलैंड की ही एक कार्बन स्टोरेज फर्म कार्बफिक्स (Carbfix) इस कार्बन डाईऑक्साइड को पानी में घोलकर जमीन में इंजेक्ट करेगी. जमीन में जाकर रासायनिक प्रतिक्रिया के बाद ये चट्टान में तब्दील हो जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया को पास ही एक जियोथर्मल एनर्जी प्लांट संचालित करेगा. 

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Direct air capture
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का समर्थन किया है (Photo: AFP)

इस तकनीक को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर दुनिया को जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करना है, तो यह तकनीक बहुत ज़रूरी है. 

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, फिलहाल दुनिया में 18 डायरेक्ट एयर कैप्चर फैसिलिटी हैं. अमेरिकी तेल फर्म ऑक्सिडेंटल (Occidental) भी 2024 के अंत में, इसी तरह का बड़ा प्लांट लाने की योजना बना रही है, जिससे हर साल 10 लाख टन CO2 इकट्ठी की जा सकेगी.

 

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सरकारी पैनल ने कहा है कि आने वाले दशकों में बड़े पैमाने पर CO2 को हटाने, ग्लोबल वार्मिंग को 1.5C तक सीमित करने और तेजी से गंभीर जलवायु प्रभावों से बचने के लिए, DAC जैसी तकनीकों की जरूरत होगी.

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