सहारनपुर के थाना जनकपुरी क्षेत्र की सड़क दूधली के महीपुरा कॉलोनी के रहने वाले डॉ. प्रभात कुमार वर्मा के साथ 90 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है. ये ठगी आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बिल पास कराने के नाम पर हुई. ठगों ने लखनऊ से डॉक्टर को झांसे में लेकर उनके बैंक खाते से पैसे हड़प लिए. बताया जाता है कि ठगों ने बिल पास करने के लिए डॉक्टर को 10 प्रतिशत कमीशन देने का भी वादा किया था.
हालांकि, अलग-अलग किस्तों में 90 लाख रुपये ठगने के बाद ठगों ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर दिया. कई बार संपर्क करने के बाद भी जब नंबर बंद आया तो डॉक्टर को ठगी का आभास हुआ. इस पूरे मामले को लेकर डॉ.प्रभात कुमार वर्मा ने 11 नवंबर को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि ठगों ने गूगल से उनका डाटा लेकर उन्हें फोन किया. उनसे ठगों ने कहा कि वे आयुष्मान योजना के बिल जल्दी पास करा सकते हैं.
ऐसे में उन्होंने ठगों की बातों पर भरोसा कर लिया. ठगों ने सबसे पहले उनसे 20 लाख रुपया ट्रांसफर करवाया. इसके बाद ठगों ने कहा कि और पैसे अधिकारियों को देने हैं, जिसके चलते डॉक्टर ने कुल 90 लाख रुपए ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए. इसके बाद ठगों ने अपने फोन बंद कर लिया.
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इस मामले की जांच साइबर थाना पुलिस कर रही है. जांच में पता चला कि ठगी का मास्टरमाइंड लखनऊ में सक्रिय था. इसके बाद पुलिस ने एक टीम को लखनऊ भेजा, जहां पांच दिन की मशक्कत के बाद पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार ठगों में अंकित जायसवाल, अभय शर्मा, और विवेक शर्मा शामिल हैं.
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गिरोह डॉक्टरों को बनाता था निशाना
पुलिस की जांच में ये बात सामने आई कि ठगों का ये गिरोह गूगल से डेटा लेकर डॉक्टरों और नर्सिंग होम मालिकों को निशाना बनाता था. वे आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बिल पास कराने के बहाने मोटी रकम वसूलते थे. अंकित जायसवाल को इस गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. ठगी के इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है.
साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, और बैंक खातों से जुड़े कई सबूत बरामद किए हैं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है. इस घटना ने डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है.