इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लग रहा है. यह सदी का सबसे बड़ा आंशिक चंद्र ग्रहण होने वाला है.
यह चंद्रग्रहण 580 वर्षों के बाद सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण है. इससे पहले इतना लंबा चंद्र ग्रहण 18 फरवरी 1440 को लगा था.
बता दें कि आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा के कुछ ही भाग पर पृथ्वी की छाया पड़ती है.
चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है.
इस दौरान चंद्रमा कुछ घंटों के लिए पृथ्वी की छाया में ढक जाता है.
चंद्रमा की सफेद-भूरे रंग की सतह से सूरज की रोशनी के कारण इसका कलर लाल हो जाता है.
एक साल में अधिकतम तीन चंद्र ग्रहण हो सकते हैं. नासा का अनुमान है कि 21वीं सदी में कुल 228 चंद्र ग्रहण होंगे.
साइंस के मुताबिक, चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है. लेकिन ज्योतिष में इसे अशुभ माना जाता है.
इस चंद्रग्रहण को उपछाया चंद्रग्रहण भी कहा गया है. उपछाया में सूतक काल मान्य नहीं होता है.
स्पेस विज्ञानी पहले से ही आने वाले कई वर्षों के ग्रहण की जानकारी रखते हैं. इसके लिए जटिल कैलकुलेशन की जरूरत होती है.
पृथ्वी और चंद्रमा के घूमने के सही पथ की ट्रैकिंग पहले से प्रिडिक्ट की जाती है. जिससे पता चलता है कि अगली बार ग्रहण की स्थिति कब बनेगी.