रूस ने अपने एक पुराने सैटेलाइट को धरती की निचली कक्षा में उड़ा दिया.
रूस ने एक एंटी-सैटेलाइट मिसाइल दागकर इसे अंजाम दिया, लेकिन इससे अंतरिक्ष में खलबली मच गई.
सैटेलाइट के टुकड़े अंतरिक्ष में फैलने के बाद इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स को कैप्सूल में छिपना पड़ा.
रूस के अपने सैटेलाइट कॉसमॉस-1408 को अंतरिक्ष में तबाह करने के बाद कई देश इसकी आलोचना कर रहे हैं.
इस सैटेलाइट का वजन 2000 किलोग्राम था. इसे साल 1982 में लॉन्च किया गया था. यह पिछले कुछ सालों से निष्क्रिय था.
जब मिसाइल से इसे उड़ाया गया तब यह सैटेलाइट धरती से 485 किलोमीटर की ऊंचाई पर था.
अमेरिका के मुताबिक, रूस की इस हरकत की वजह से स्पेस स्टेशन पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स की जिंदगी खतरे में पड़ गई थी.
कहा जा रहा है कि रूस की वजह से दुनियाभर के देशों के सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन के लिए खतरा पैदा किया है.
यूएस के मुताबिक, इंसानी अंतरिक्ष उड़ानों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है क्योंकि कचरा अब धरती की निचली कक्षा में तैरता रहेगा.
अंतरिक्ष स्टेशन पर इस समय सात एस्ट्रोनॉट्स मौजूद हैं. जिन्हें कचरे के डर से सोयुज और ड्रैगन कैप्सूल में करीब 90 मिनट बिताने पड़े.
इससे पहले रूस ने साल 2014 के बाद से अब तक 10 बार एंटी-सैटेलाइट मिसाइलों का परीक्षण किया है.
2007 में चीन ने भी अपने सैटेलाइट पर मिसाइल से सीधा हमला करके काफी ज्यादा मात्रा में कचरा पैदा किया था.
मार्च 2019 में भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल से एक छोटे सैटेलाइट को ध्वस्त किया था.